कांगड़ा: पहाड़ी भाषा में 14 किताबें लिखने वाले साहित्यकार नवीन हलदूनवी नहीं रहे
पहाड़ी भाषा के कवि, साहित्यकार और विचारक नवीन हलदूनवी का शनिवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। शनिवार को नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। नवीन हलदूनवी अंतिम समय तक लिखते रहे। अभी उनकी कुछ रचनाएं प्रकाशित होने वाली हैं।
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के छतरौली गांव के पहाड़ी भाषा के कवि, साहित्यकार और विचारक नवीन हलदूनवी का शनिवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। शनिवार को नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। नवीन हलदूनवी का जन्म कांगड़ा की हल्दूण घाटी के गांव पंजराल में 24 दिसंबर 1949 को हुआ था। यह स्थान वर्तमान में पौंग बांध में समाहित हो चुका है। परास्नातक हिंदी प्रभाकर नवीन हलदूनवी की कुल 17 पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिनमें से 14 पुस्तकें पहाड़ी व 3 हिंदी भाषा में थीं। उनकी ‘बोल्ला करदे पहाड़’ पुस्तक पर अमेरिकन नागरिक रिचर्डसन रिसर्च कर रहे हैं।
इसके अलावा कुड़मा दे नखरे, काल्हु निखरगा रंग, माहौल वगाड़ीता, लोक ग्लांदे सारे, मैंझर, मने दी भड़ास, एह दुनिया, भारते नै प्यार आदि पहाड़ी पुस्तकें खासी लोकप्रिय रही हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी दिल्ली और नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से भी उनकी रचनाएं प्रकाशित की गई हैं। पहाड़ी भाषा के पुरोधा से प्रचलित नवीन हलदूनवी को बागर पहाड़ी साहित्य सम्मान, सुरभि साहित्य श्री, साहित्य दीप, आचार्य विशिष्ट सम्मान, राज्यस्तरीय शेष स्मृति सम्मान, कायाकल्प साहित्य शिरोमणि सम्मान सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया है।
निधन से एक दिन पहले फेसबुक पर शेयर की पोस्ट
नवीन हलदूनवी अंतिम समय तक लिखते रहे। अभी उनकी कुछ रचनाएं प्रकाशित होने वाली हैं। निधन से एक दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर अपनी 2 साल पहले लिखी गई कविता ‘मुकी गे गीत’ यानी खत्म हो गए गीत पोस्ट शेयर की थी। उनके देहांत पर नूरपुर के वन मंत्री राकेश पठानिया, पूर्व विधायक अजय महाजन, केसीसी बैंक के चेयरमैन डॉ. राजीव भारद्वाज, रणबीर सिंह निक्का सहित क्षेत्र के अनेक संगठनों ने शोक जताया है।