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Shimla News: चेक बाउंस मामले में महिला को एक साल का कारावास
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1.47 लाख रुपये जुर्माना भी देना होगा
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने चेक बाउंस मामले में उपमंडल रामुपर निवासी दीपा भलूनी को दोषी करार देते हुए एक साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता को 1.47 लाख रुपये की राशि का एकमुश्त जुर्माना भी देना होगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। दोषी महिला ने वित्तीय सहायता के लिए ऋण लिया था।
शिकायतकर्ता ज्ञान सिंह के अनुसार आरोपी ने 12 फरवरी 2021 को वित्तीय सहायता के लिए संपर्क किया। इसके बाद आरोपी को 80,000 और 40,000 रुपये की राशि उधार दी। कुछ दिनों बाद आरोपी ने शेष राशि का भुगतान करने के लिए शिकायतकर्ता को 1.20 लाख रुपये का चेक जारी किया। लेकिन 28 अक्तूबर को खाते में धन कम होने से चेक बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपी को राशि के भुगतान करने के लिए कानूनी नोटिस जारी किया। 5 जनवरी 2022 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गईं और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने महिला को दोषी करार देते यह फैसला सुनाया है। संवाद
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह की अदालत का फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने चेक बाउंस मामले में उपमंडल रामुपर निवासी दीपा भलूनी को दोषी करार देते हुए एक साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता को 1.47 लाख रुपये की राशि का एकमुश्त जुर्माना भी देना होगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। दोषी महिला ने वित्तीय सहायता के लिए ऋण लिया था।
शिकायतकर्ता ज्ञान सिंह के अनुसार आरोपी ने 12 फरवरी 2021 को वित्तीय सहायता के लिए संपर्क किया। इसके बाद आरोपी को 80,000 और 40,000 रुपये की राशि उधार दी। कुछ दिनों बाद आरोपी ने शेष राशि का भुगतान करने के लिए शिकायतकर्ता को 1.20 लाख रुपये का चेक जारी किया। लेकिन 28 अक्तूबर को खाते में धन कम होने से चेक बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपी को राशि के भुगतान करने के लिए कानूनी नोटिस जारी किया। 5 जनवरी 2022 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गईं और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने महिला को दोषी करार देते यह फैसला सुनाया है। संवाद
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