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Shimla News: आखिर कहां गायब हो गए विश्व बैंक से मिले करोड़ों रुपये
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भाजपा पार्षदों ने की घेरने की तैयारी, इस बार होने वाले नगर निगम के मासिक सदन के लिए भेजे सवाल
क्रॉसर विश्व बैंक ने पेयजल योजना के लिए दिए हैं 587 करोड़
इसके बावजूद ऋण लेने को मजबूर हो गई कंपनी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने की योजना के लिए विश्व बैंक से जारी हुआ करोड़ों रुपया आखिर कहां गायब हो गया। इस पर अब भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इस पूरे मामले में कंपनी से जवाब मांगा है। इस महीने होने वाले मासिक सदन में इस पर लिखित जवाब लिया जाएगा।
इसके लिए भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने सदन के लिए सवाल भेजे हैं। पार्षद की ओर से शनिवार को नगर निगम कार्यालय को यह सवाल एजेंडे में शामिल करने के लिए भेजे हैं। इसमें नगर निगम आयुक्त और पेयजल कंपनी के अधिकारियों से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। पूछा है कि आखिर इस योजना में कितना पैसा बैंक ने दिया, योजना पर कितना खर्च हुआ, बाकी पैसा कहां अटका है। इस योजना पर अचानक खड़े हुए बजट के संकट पर सदन में हंगामा होने के आसार हैं। शिमला शहर को 24 घंटे पानी देने की योजना के लिए विश्व बैंक करीब 587 करोड़ रुपये जारी कर चुका है। हालांकि इसमें से करीब 250 करोड़ रुपये ही पेयजल कंपनी को मिले हैं। बाकी पैसा कंपनी तक नहीं पहुंचा है।
पैसों की कमी के चलते योजना का काम आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है। काम जारी रखने के लिए कंपनी को मजबूरन सौ करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ रहा है। भाजपा का कहना है कि जब विश्व बैंक पैसा जारी कर रहा है तो यह कंपनी तक क्यों नहीं पहुंच रहा। आखिर यह पैसा कहां गायब हो गया। शर्ताें के अनुसार यह पैसा सिर्फ इस पेयजल योजना पर ही खर्च हो सकता है। बाकी कामों पर इसे खर्च नहीं कर सकते।
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निदेशक मंडल की बैठक पर टिकीं नजरें
20 नवंबर को पेयजल कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक भी होने जा रही है। इसमें कंपनी सौ करोड़ रुपये लोन लेने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखेगी। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें हैं। नगर निगम की ओर से महापौर और उप महापौर भी इस बैठक का हिस्सा होंगे। इस बैठक के बाद नगर निगम का मासिक सदन होना है।
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क्रॉसर विश्व बैंक ने पेयजल योजना के लिए दिए हैं 587 करोड़
इसके बावजूद ऋण लेने को मजबूर हो गई कंपनी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पेयजल सुविधा देने की योजना के लिए विश्व बैंक से जारी हुआ करोड़ों रुपया आखिर कहां गायब हो गया। इस पर अब भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इस पूरे मामले में कंपनी से जवाब मांगा है। इस महीने होने वाले मासिक सदन में इस पर लिखित जवाब लिया जाएगा।
इसके लिए भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने सदन के लिए सवाल भेजे हैं। पार्षद की ओर से शनिवार को नगर निगम कार्यालय को यह सवाल एजेंडे में शामिल करने के लिए भेजे हैं। इसमें नगर निगम आयुक्त और पेयजल कंपनी के अधिकारियों से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। पूछा है कि आखिर इस योजना में कितना पैसा बैंक ने दिया, योजना पर कितना खर्च हुआ, बाकी पैसा कहां अटका है। इस योजना पर अचानक खड़े हुए बजट के संकट पर सदन में हंगामा होने के आसार हैं। शिमला शहर को 24 घंटे पानी देने की योजना के लिए विश्व बैंक करीब 587 करोड़ रुपये जारी कर चुका है। हालांकि इसमें से करीब 250 करोड़ रुपये ही पेयजल कंपनी को मिले हैं। बाकी पैसा कंपनी तक नहीं पहुंचा है।
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पैसों की कमी के चलते योजना का काम आगे बढ़ाने में परेशानी आ रही है। काम जारी रखने के लिए कंपनी को मजबूरन सौ करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ रहा है। भाजपा का कहना है कि जब विश्व बैंक पैसा जारी कर रहा है तो यह कंपनी तक क्यों नहीं पहुंच रहा। आखिर यह पैसा कहां गायब हो गया। शर्ताें के अनुसार यह पैसा सिर्फ इस पेयजल योजना पर ही खर्च हो सकता है। बाकी कामों पर इसे खर्च नहीं कर सकते।
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निदेशक मंडल की बैठक पर टिकीं नजरें
20 नवंबर को पेयजल कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक भी होने जा रही है। इसमें कंपनी सौ करोड़ रुपये लोन लेने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखेगी। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें हैं। नगर निगम की ओर से महापौर और उप महापौर भी इस बैठक का हिस्सा होंगे। इस बैठक के बाद नगर निगम का मासिक सदन होना है।