वीरभद्र बोले- बिखर गया कांग्रेस का कुनबा, बिना चुनाव नहीं चल सकती पार्टी
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि आज कांग्रेस का कुनबा बिखर गया है। संस्थाएं कमजोर हो गई हैं। इन्हें मजबूत करने की जरूरत है। कई सालों से चुनाव नहीं हो पाए हैं। पहले हर पांच साल बाद संगठनात्मक चुनाव होते थे। पार्टी के 100 साल जीने के लिए समय-समय पर चुनाव जरूरी हैं। उन्होंने नामांकन वाली प्रणाली पर सवाल उठाए।
कहा कि पुरानी चुनाव प्रक्रिया के तहत पदाधिकारियों की नियुक्ति जरूरी है। रविवार को पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह कुल्लू के सेउबाग स्थित प्रदेश कांग्रेस महासचिव धर्मवीर धामी के निवास स्थान में अभिनंदन समारोह में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि बिना चुनाव पार्टी नहीं चल सकती है।
नए और योग्य लोगों को आगे आने का मौका मिलना जरूरी है। कहा कि वर्तमान में पार्टी में अच्छे लोग हैं, लेकिन उन्हें आगे आने का मौका नहीं मिलता। यह बात कई लोगों को पसंद नहीं आएगी, लेकिन संगठन मजबूती को कांग्रेस संविधान को अपनाना जरूरी है। पुराने दौर में संगठनात्मक चुनाव बैलेट बॉक्स प्रणाली से होते थे।
उन्होंने खुद चुनाव करवाए हैं। पूर्व सीएम बोले - इस पर मैं किताब भी लिखूंगा। कहा कि किसी की मर्जी के अनुसार नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। इस दौरान विधायक विक्रमादित्य सिंह, पूर्व वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, पूर्व मंत्री सत्य प्रकाश ठाकुर, नप उपाध्यक्ष गोपाल कृष्ण महंत, बुद्धि सिंह ठाकुर, हरि चंद शर्मा, अनूपराम ठाकुर, राजीव किमटा और किशन ठाकुर मौजूद रहे।
गलतफहमियों में रह रहे जयराम
वीरभद्र सिंह ने कहा कि सीएम जयराम ठाकुर की शराफत पर कोई शक नहीं है, लेकिन वे गलतफहमियों में रह रहे हैं। उनके आसपास के लोग अनुभवहीन हैं। ओएसडी तथा अन्य अधिकारी अनुभव वाले होने चाहिए।
वर्तमान सीएम के ओएसडी आरएसएस से हैं और उन्हें कोई अनुभव नहीं है। ऐसे लोग इन पदों पर नियुक्त किए जाने चाहिए, जिन पर सीएम और जनता विश्वास करते हों। कहा कि नेरचौक मेडिकल कॉलेज का श्रेय भाजपा लेने की कोशिश कर रही है। यह कांग्रेस की देन है।
शिक्षा के प्रति नई सरकार उदासीन- पूर्व सीएम ने कहा कि नई सरकार शिक्षा के प्रति उदासीन है। उनका वश चले तो वह खोले गए शिक्षण संस्थानों को बंद करवा दें, लेकिन जनता ऐसा होने नहीं देगी। नए खोले कॉलेजों में दाखिले के लिए स्टाफ तक नहीं भेजा गया। दबाव के बाद स्टाफ गया तो अब प्राध्यापक नहीं हैं। कुछ दुर्गम क्षेत्रों से भारी पैमाने पर छह माह बाद ही शिक्षकों का तबादला किया गया है।