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सीएम सुक्खू की घोषणा: हिमाचल में बनेगा अलग माइनिंग विभाग, नई ड्रेजिंग नीति भी लाएगी प्रदेश सरकार

Thu, 03 Sep 2026 09:42 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Sep 2026 09:42 PM IST
सार

प्रदेश की नदियों में जमा रेत, बजरी और गाद अब केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि हजारों करोड़ की संभावित अर्थव्यवस्था का केंद्र बन गई है। विधानसभा में अंतिम दिन ड्रेजिंग और माइनिंग का मुद्दा गरमाया। 

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separate mining department will be set up in Himachal; the state govt will also introduce a new dredging polic
विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की नदियों में जमा रेत, बजरी और गाद अब केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं, बल्कि हजारों करोड़ की संभावित अर्थव्यवस्था का केंद्र बन गई है। विधानसभा में अंतिम दिन ड्रेजिंग और माइनिंग का मुद्दा गरमाया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य में अलग माइनिंग विभाग बनाने और नई ड्रेजिंग नीति लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि नदियों में खनन और ड्रेजिंग को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित किया जाए तो प्रदेश को सालाना करीब 3000 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता है। प्रश्नकाल में बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल से पांच प्रमुख नदियां बहती हैं, जबकि उत्तराखंड में दो बड़ी नदियों से माइनिंग के जरिये सालाना 300 से 400 करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा है। हिमाचल में संसाधन कहीं अधिक हैं। इनके वैज्ञानिक और व्यवस्थित दोहन से प्रदेश आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी छलांग लगा सकता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में खनन कार्य उद्योग विभाग के माइनिंग विंग के माध्यम से संचालित हो रहा है। काम का दायरा बढ़ने के कारण स्वतंत्र माइनिंग विभाग बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वर्ष 2023 की आपदा के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हिमाचल दौरे के दौरान नदियों में जमा गाद और मलबे को हटाने के लिए ड्रेजिंग का सुझाव दिया था। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद कुल्लू में तीन साइटों पर ड्रेजिंग शुरू करवाई गई। हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के साथ हुई बैठक में भी ड्रेजिंग सामग्री के इस्तेमाल का मुद्दा उठा। केंद्र की ओर से इसे सड़क निर्माण में उपयोग करने की बात कही गई, लेकिन राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि सामग्री से मिलने वाली रॉयल्टी हिमाचल का अधिकार है और इससे कोई समझौता नहीं होगा।

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वन निगम के जरिये हुआ ड्रेजिंग का काम
सरकार ने फिलहाल कई स्थानों पर ड्रेजिंग का काम हिमाचल प्रदेश वन निगम के माध्यम से करवाया है। भविष्य में अलग विभाग बनने पर दोनों गतिविधियों को एकीकृत तरीके से संचालित किया जाएगा। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि ड्रेजिंग और माइनिंग अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। ड्रेजिंग से निकली सामग्री की सीधे बिक्री नहीं की जा सकती, बल्कि उसकी नीलामी करनी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई ड्रेजिंग नीति तैयार की जा रही है।

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जयराम बोले - आपदा में अवसर तलाश रही सरकार
सरकार के अनुसार अब तक विभिन्न परियोजनाओं से करीब 74 हजार टन सामग्री निकाली जा चुकी है। प्रदेश को वर्तमान में माइनिंग रॉयल्टी से करीब 350 करोड़ रुपये सालाना आय हो रही है। सरकार का दावा है कि नई नीति और स्वतंत्र विभाग से यह राजस्व कई गुना बढ़ सकता है। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार आपदा में अवसर तलाश रही है। उन्होंने ब्यास नदी में हुई ड्रेजिंग की जांच की मांग करते हुए पूछा कि निकाली गई सामग्री कहां गई और उससे सरकार को कितना राजस्व मिला। उन्होंने भारी मशीनरी से ड्रेजिंग और सामग्री की बिक्री में अनियमितताओं का आरोप लगाया।

बीबीएमबी से भी टकराव
मुख्यमंत्री ने सदन में खुलासा किया कि बीबीएमबी ने बांधों की डिसिल्टिंग के लिए टेंडर जारी किए थे। राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जमीन हिमाचल की है और उसकी अनुमति के बिना काम नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 सितंबर के प्रस्तावित दिल्ली दौरे में वह केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष हिमाचल के अधिकारों और राजस्व हितों का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे।

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