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बदहाल व्यवस्था: नवजात की किलकारी के बाद मां की चारपाई यात्रा, दो किमी तक उठाकर पहुंचाया घर, वीडियो वायरल

Thu, 03 Sep 2026 08:04 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Sep 2026 08:04 PM IST
सार

 21वीं सदी में यह तस्वीर उपमंडल नाहन की सलानी कटोला पंचायत के मोहलिया गांव की है, जहां मुख्य सड़क से गांव तक करीब दो किलोमीटर का रास्ता आज भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। 

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Mother carried on a cot after newborn's arrival; taken home after being carried for two kilometers—video goes
नवजात की किलकारी के बाद मां की चारपाई यात्रा। - फोटो : संवाद

विस्तार

एक तरफ घर में नवजात बेटे की किलकारी गूंजी तो दूसरी तरफ प्रसव के बाद मां को घर पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को चारपाई का सहारा लेना पड़ा। 21वीं सदी में यह तस्वीर हिमाचल प्रदेश के सिरमाैर जिले के उपमंडल नाहन की सलानी कटोला पंचायत के मोहलिया गांव की है, जहां मुख्य सड़क से गांव तक करीब दो किलोमीटर का रास्ता आज भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। रास्ता संकरा होने के साथ कई हिस्से कच्चे हैं और बरसात में फिसलन के कारण स्थिति और बदतर हो जाती है। गुरुवार को मोहलिया निवासी दीपक कुमार की पत्नी पायल पंवार को प्रसव के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली। मुख्य सड़क तक महिला और नवजात को वाहन से पहुंचाया गया, लेकिन वहां से घर तक करीब दो किलोमीटर के रास्ते ने परिवार की मुश्किल बढ़ा दी।

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ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर खुद पक्का किया रास्ता
आखिरकार ग्रामीणों और परिजनों ने पायल को चारपाई पर लैटाया और करीब दो किलोमीटर का कठिन सफर पैदल तय कर घर पहुंचाया। फिसलन भरे रास्ते में ग्रामीण कई बार संभलते नजर आए। ग्रामीणों के अनुसार रास्ते के कुछ हिस्से की बदहाली से परेशान होकर उन्होंने हाल ही में अपने स्तर पर पैसे एकत्रित कर उसे पक्का करवाया था। इसके बावजूद अधिकांश रास्ता अभी भी कच्चा और संकरा है। गांव तक बना पुल भी इतना संकरा है कि केवल दोपहिया वाहन ही निकल पाते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना या वापस घर पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।
 

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सड़क की मांग कई बार नेताओं से उठाई, लेकिन समाधान नहीं: ग्रामीण
दीपक कुमार सहित ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मांग कई बार नेताओं और पंचायत के समक्ष उठाई जा चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का सवाल है कि जब प्रसव के बाद एक महिला को घर तक पहुंचाने के लिए आज भी चारपाई उठानी पड़े तो गांव में बुनियादी सड़क सुविधा के दावों की हकीकत क्या है। पंचायत प्रधान सपना देवी ने बताया कि पहले बना रास्ता नदी की भेंट चढ़ गया था। वहीं, रास्ते के कुछ हिस्से में निजी भूमि आती है और संबंधित लोग जमीन देने को तैयार नहीं हैं। इसी कारण सड़क निर्माण में परेशानी आ रही है।

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