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20 साल बाद सियासी अखाड़े में भिडे़ दो धुरंधर, खूब चले शब्दों के तीर

Sat, 19 Aug 2017 02:11 PM IST
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, मंडी
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, मंडी Updated Sat, 19 Aug 2017 02:11 PM IST
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virbhadra singh and pandit sukhram in congress programme in mandi

84 साल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और 92 साल के पंडित सुखराम। प्रदेश की राजनीति के दो दिग्गज करीब बीस साल के बाद फिर से सियासी अखाड़े में एक-दूसरे के सामने खड़े थे। ढल चुकी उम्र में भी उनकी बहस में तीखापन, तंज और ताजगी जिंदा थी।

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इन दोनों उम्र दराज वक्ताओं की जुबान से निकले एक एक शब्द को सुनने के लिए लोगों में खासी दिलचस्पी रही। मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे की दाईं ओर सुखराम और बाईं तरफ वीरभद्र सिंह बैठे थे। 

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मंच पर जुबानी जंग

virbhadra singh and pandit sukhram in congress programme in mandi

मंच पर जुबानी जंग का आगाज 92 वर्षीय सुखराम ने किया। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह को हिमाचल में विकास का मसीहा कहा जाता है। लेकिन विकास में तो भाजपा का भी योगदान है।

चुटकी लेते हुए पं. सुखराम बोले-, भाजपा को प्रदेश में सत्ता में लाकर पूरे पांच वर्ष तक कायम रहने की भूमि देने वाल एक कांग्रेसी था। अब तो कांग्रेस के विधायकों में भय का माहौल है।

सुखराम ने कहा- मैं अब भी राजनीति में उतरना चाहता हूं। लेकिन जब तक मैं तमाम इलजामों से बरी नहीं हो जाता तब तक सियासत में नहीं लौटूंगा। उन्होंने कहा- कांग्रेस एक विचारधारा है, किसी व्यक्ति विशेष की पार्टी नहीं। लोग आज भी मुझे संचार क्रांति का मसीहा कहते हैं।

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सीएम का पलटवार, इधर उधर छलांगे मारते रहे राजनैतिक रूप से अस्थिर सुखराम

virbhadra singh and pandit sukhram in congress programme in mandi

अब बारी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की आई। उन्होंने मंच से कहा- केंद्र में संचार मंत्री रहते पंडित सुखराम ही यहां टेलीफोन लेकर आए थे। यह अच्छा काम था लेकिन यह एक फर्ज था। वीरभद्र बोले-बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़ी। उनका चुनाव चिन्ह भी टेलीफोन ही था।

इनके एमएलए बने और भाजपा के साथ सरकार बनाई। हम विपक्ष में बैठे। सच्चाई पूरी सामने आनी चाहिए। सीएम ने कहा- जब पहली दफा मुझे मंडी से टिकट मिला, तब पं. सुखरामजी थे जिन्होंने मुझे बुलाया और अपनी गाड़ी में मंडी में घुमाया।

मेरे शुरुआती सियासी सफर में पंडित सुखराम ने मुझे प्रोजेक्ट किया। लेकिन जो सही नहीं किया मैं उस पर भी बात करना चाहता हूं। इनमें राजनैतिक स्थिरता नहीं रही। 

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खूब हंसे लोग

virbhadra singh and pandit sukhram in congress programme in mandi

कभी दाएं कभी बाएं छलांगे मारते रहे। फिर भी मैं इनके काम करने की क्षमता का आदर करता हूं। खैर समझदार को इशारा ही काफी है। वीरभद्र बोले, जल्द मैं इन सब पर किताब लिखने वाला हूं। इस टिप्पणी पर लोग खूब हंसे।

दोनों की जुबानी तकरार के बाद अंत में प्रदेश प्रभारी शिंदे ने माहौल बदलते हुए कहा कि उनके लिए यह हर्ष की बात है कि एक तरफ 84 तो दूसरी तरफ 92 साल के युवक बैठे हैं।

बीच में 76 साल का मैं बैठा हूं। इससे बड़ा अनुभव और समन्वय क्या हो सकता है। सीएम साहब ने तो दिल खोल कर बोल दिया है।

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