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पूर्व सीपीएस उर्मिल ने सीएम जयराम से की मुलाकात, चर्चाओं का बाजार गर्म

Fri, 02 Nov 2018 11:17 AM IST
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर Updated Fri, 02 Nov 2018 11:17 AM IST
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Urmil Thakur meets CM Jairam Thakur in hamirpur Himachal Pradesh

पूर्व मुख्य संसदीय सचिव उर्मिल ठाकुर ने परिधिगृह में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुलाकात की। उन्होंने सीएम को पुष्प गुच्छ भेंट किया और हमीरपुर आगमन पर स्वागत किया। उर्मिल भाजपा से दो बार विधायक और एक बार सीपीएस रही हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री रहे जगदेव चंद ठाकुर की पुत्रवधू हैं।

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हमीरपुर भाजपा में फायरब्रांड नेता रही हैं। बीते विस चुनाव में टिकट कटने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हमीरपुर दौरे के दौरान उन्होंने कांग्रेस का पटका पहना था। अब फिर से उनकी भाजपा में शामिल होने को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ उनकी पुरानी नजदीकियां भी हैं। धूमल सरकार में दोनों ने एक साथ पार्टी और सरकार में कार्य किया है। अगले वर्ष लोकसभा चुनाव हैं। इससे ठीक पहले उनका मुख्यमंत्री जयराम से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। वीरभद्र सरकार में उर्मिल ठाकुर को सरकार और संगठन में कोई बड़ा ओहदा नहीं मिला। कांग्रेस से दूरियों की यह भी एक वजह मानी जा रही है।

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कौन हैं उर्मिल ठाकुर

Urmil Thakur meets CM Jairam Thakur in hamirpur Himachal Pradesh

उधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा कि जयराम ठाकुर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। वे भाजपा या कांग्रेस के मुख्यमंत्री नहीं हैं। लोकतंत्र में किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता या पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिल सकता है। पूर्व सीपीएस उर्मिल ठाकुर का कहना है कि उनकी आगामी रणनीति क्या होगी, यह आने वाला समय और जिले की जनता तय करेगी। फिलहाल, उचित समय का इंतजार है।

वर्ष 1998 में जब प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने तो उर्मिल ठाकुर हमीरपुर से विधायक चुनी गईं। 2007 से 2012 तक दूसरी बार विधायक बनीं। इससे पहले 1996 में वे बगेहड़ा वार्ड से जिला परिषद सदस्य चुनी गईं।

जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ा। कांग्रेस और भाजपा के 9-9 सदस्य होने के चलते टॉस से अध्यक्ष फैसला हुआ। इसमें वे पिछड़ गईं। वर्ष 2013 में पुनर्सीमांकन के चलते हमीरपुर से सुजानपुर विस क्षेत्र भेज दिया गया और वह निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र राणा से चुनाव हार गईं।

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