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राजनीतिक प्रभाव में कार्य कर रही है विवि की ईसी : हपुटवा
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एडवांसमेंट स्कीम के तहत दें पदोन्नति
शिक्षकों को उनके अधिकारों से किया जा रहा वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक पर तीखा विरोध दर्ज करते हुए आरोप लगाया है कि परिषद अब शैक्षणिक निर्णयों के बजाय राजनीतिक प्रभाव में कार्य कर रही है। संघ ने इसे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और शैक्षणिक माहौल के लिए चिंताजनक बताया है।
संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक सात वर्षों से कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नति की मांग कर रहे हैं लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इनके अनुसार सीएएस शिक्षकों के शैक्षणिक विकास और शोध को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
संघ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने ए और बी श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन से तीन प्रतिशत कटौती के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर वित्तीय लाभ लंबित हैं, वहीं दूसरी ओर वेतन में कटौती कर कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
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संघ ने कहा कि सरकार राजस्व घाटे की भरपाई के लिए कर्मचारियों पर दबाव बना रही है जबकि अन्य वर्गों को राहत मिल रही है। कार्यकारी परिषद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हपुटवा ने कहा कि यह संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है। संघ ने मांग की कि परिषद को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर पारदर्शी और निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित किए जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सीएएस पदोन्नतियां बहाल नहीं की गईं वेतन कटौती वापस नहीं ली गई और लंबित वित्तीय लाभ जारी नहीं किए तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा जिसमें प्रदेश भर के शिक्षक भाग लेंगे।
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शिक्षकों को उनके अधिकारों से किया जा रहा वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक पर तीखा विरोध दर्ज करते हुए आरोप लगाया है कि परिषद अब शैक्षणिक निर्णयों के बजाय राजनीतिक प्रभाव में कार्य कर रही है। संघ ने इसे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और शैक्षणिक माहौल के लिए चिंताजनक बताया है।
संघ के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक सात वर्षों से कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नति की मांग कर रहे हैं लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इनके अनुसार सीएएस शिक्षकों के शैक्षणिक विकास और शोध को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
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संघ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने ए और बी श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन से तीन प्रतिशत कटौती के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर वित्तीय लाभ लंबित हैं, वहीं दूसरी ओर वेतन में कटौती कर कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
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संघ ने कहा कि सरकार राजस्व घाटे की भरपाई के लिए कर्मचारियों पर दबाव बना रही है जबकि अन्य वर्गों को राहत मिल रही है। कार्यकारी परिषद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हपुटवा ने कहा कि यह संस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है। संघ ने मांग की कि परिषद को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर पारदर्शी और निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित किए जाए। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सीएएस पदोन्नतियां बहाल नहीं की गईं वेतन कटौती वापस नहीं ली गई और लंबित वित्तीय लाभ जारी नहीं किए तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा जिसमें प्रदेश भर के शिक्षक भाग लेंगे।