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मॉक ड्रिल : रोपवे में फंसे दो लोगों का एनडीआरएफ ने किया रेस्क्यू
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आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने किया पूर्वाभ्यास
रोपवे पर साल में दो बार होती है मॉक ड्रिल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाखू रोपवे में आपात स्थिति के दौरान पर्यटकों और यात्रियों को सुरक्षित निकालने की तैयारियों को परखने के लिए बुधवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान समुद्रतल से आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जाखू हिल्स पर रोपवे में फंसे दो पर्यटकों को सुरक्षित रेस्क्यू करने का पूर्वाभ्यास किया गया।
जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई इस ड्रिल में एनडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों और आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल के दौरान रोपवे के बीच में अचानक खराब होने की स्थिति बनाई गई। इसके बाद रोपवे की ट्रॉली में दो पर्यटकों के फंसे होने की सूचना एनडीआरएफ की टीम को दी गई। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की छह सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। करीब 200 मीटर दूर रोपवे की ट्रॉली में फंसे दोनों पर्यटकों को कुछ ही समय में रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।
सुबह 11:00 बजे से शुरू हुआ पूर्वाभ्यास 12:30 तक चला। जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज ने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य रोपवे से जुड़ी आपात स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारी, आपसी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का आकलन करना है। जाखू रोपवे शिमला का एकमात्र रोपवे हैं और इससे हर साल हजारों पर्यटक आवाजाही करते हैं। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर नियमित रूप से पूर्वाभ्यास किया जाता है जिससे ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
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जेनसेट पर भी संचालित होता है रोपवे
जाखू रोपवे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए हैं। जगसन कंपनी की ओर से संचालित जाखू रोपवे के प्रबंधक मदन शर्मा ने बताया कि रोपवे का सिस्टम बिजली के साथ जेनसेट से संचालित होता है। बिजली जाने की स्थिति में सिस्टम स्वत : जेनसेट पर शिफ्ट हो जाता है। इस दौरान एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट एवं टीम प्रभारी संजीव कुमार, इंस्पेक्टर संदीप कुमार, डीडीएमए और जिला प्रशासन के अधिकारियों समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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रोपवे पर साल में दो बार होती है मॉक ड्रिल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाखू रोपवे में आपात स्थिति के दौरान पर्यटकों और यात्रियों को सुरक्षित निकालने की तैयारियों को परखने के लिए बुधवार को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान समुद्रतल से आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जाखू हिल्स पर रोपवे में फंसे दो पर्यटकों को सुरक्षित रेस्क्यू करने का पूर्वाभ्यास किया गया।
जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई इस ड्रिल में एनडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों और आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों ने हिस्सा लिया। मॉक ड्रिल के दौरान रोपवे के बीच में अचानक खराब होने की स्थिति बनाई गई। इसके बाद रोपवे की ट्रॉली में दो पर्यटकों के फंसे होने की सूचना एनडीआरएफ की टीम को दी गई। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की छह सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया। करीब 200 मीटर दूर रोपवे की ट्रॉली में फंसे दोनों पर्यटकों को कुछ ही समय में रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।
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सुबह 11:00 बजे से शुरू हुआ पूर्वाभ्यास 12:30 तक चला। जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज ने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य रोपवे से जुड़ी आपात स्थिति में विभिन्न विभागों की तैयारी, आपसी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का आकलन करना है। जाखू रोपवे शिमला का एकमात्र रोपवे हैं और इससे हर साल हजारों पर्यटक आवाजाही करते हैं। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर नियमित रूप से पूर्वाभ्यास किया जाता है जिससे ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
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जेनसेट पर भी संचालित होता है रोपवे
जाखू रोपवे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए हैं। जगसन कंपनी की ओर से संचालित जाखू रोपवे के प्रबंधक मदन शर्मा ने बताया कि रोपवे का सिस्टम बिजली के साथ जेनसेट से संचालित होता है। बिजली जाने की स्थिति में सिस्टम स्वत : जेनसेट पर शिफ्ट हो जाता है। इस दौरान एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट एवं टीम प्रभारी संजीव कुमार, इंस्पेक्टर संदीप कुमार, डीडीएमए और जिला प्रशासन के अधिकारियों समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।