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Shimla News: ईएचएल विधि से पित्त की नली से निकाली दो सेंटीमीटर की पथरी
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-एक्सक्लूसिव-
चमियाना अस्पताल में पहली बार नई विधि से किए पांच सफल ऑपरेशन, ऑपरेशन के 24 घंटे बाद मरीजों को छुट्टी
गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने बुजुर्गों मरीजों के किए ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी (एआईएमएसएस) अस्पताल चमियाना में पित्त की नली में फंसी दो सेंटीमीटर की पथरी को निकाला गया। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओर से इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी (ईएचएल) विधि से ऑपरेशन कर पथरी निकाली गई। खास बात यह है कि ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।
यह ऑपरेशन 70 से 95 वर्ष की आयु के पांच बुजुर्ग मरीजों के किए हैं। अस्पताल में पहली बार इस विधि का प्रयोग किया है। इसके साथ विशेषज्ञों ने जटिल ऑपरेशन के लिए एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंजियोपैंक्रिएटोग्राफी (ईआरसीपी) मशीन का ट्रायल भी किया है। ट्रायल में भी सफलता मिली है। ऑपरेशन गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. ब्रिज शर्मा, डॉ. आशीष, डॉ. विशाल बौद्ध, डॉ. राजेश और उनकी टीम ने किए। अस्पताल में इससे पहले इस प्रकार के जटिल ऑपरेशन के लिए विभाग को एंडोस्कोपी की मदद लेनी पड़ती थी। सामान्य प्रक्रिया में भी काफी समय लगता था। वहीं मरीजों को ठीक होने में कई दिन लगते थे और ऑपरेशन के बाद उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था। अब सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। जल्द ही विभाग की ओर से मशीन की खरीद भी की जाएगी। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के लिए निदेशक चिकित्सा शिक्षा को प्रस्ताव भेजा है।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में मरीजों के ऑपरेशन का खर्च भी काफी कम हुआ है। पित्त की नली से पथरी निकालने के लिए ईएचएल विधि में करीब दो लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन चिकित्सकों ने यह प्रक्रिया 50 से 60 हजार रुपये में पूरी की है। इससे मरीजों की जेब पर भी कम बोझ पड़ा है।
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क्या है ईएचएल तकनीक
ईएचएल तकनीक का इस्तेमाल बड़ी पथरी को तोड़ने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से पथरी को आसानी से निकाला जा सकता है। इस तकनीक में एक विशेष प्रोब के जरिये पानी या सलाइन के माध्यम से भीतर बिजली की छोटी चिंगारी पैदा की जाती है। इससे पानी में तीव्र शॉकवेव्स यानी तरंगें पैदा होती हैं, जो सीधे पथरी से टकराकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देती है। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन के दौरान बड़ी पथरी को निकालने में काफी दिक्कतें आती हैं। अब अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग कर जटिल प्रकार की पथरी के ऑपरेशन किए जाएंगे।
कोट...
अस्पताल में पांच मरीजों के ईएचएल तकनीक से ऑपरेशन किए हैं। पहली बार अस्पताल में इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें मरीजों का खर्च भी काफी कम आया है। मरीजों को एक दिन विशेषज्ञ की देखरेख में रखने के बाद छुट्टी दे दी गई। ट्रायल के तौर पर पांच ऑपरेशन किए गए हैं।
-डॉ. ब्रिज शर्मा, प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष
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चमियाना अस्पताल में पहली बार नई विधि से किए पांच सफल ऑपरेशन, ऑपरेशन के 24 घंटे बाद मरीजों को छुट्टी
गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने बुजुर्गों मरीजों के किए ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी (एआईएमएसएस) अस्पताल चमियाना में पित्त की नली में फंसी दो सेंटीमीटर की पथरी को निकाला गया। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओर से इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी (ईएचएल) विधि से ऑपरेशन कर पथरी निकाली गई। खास बात यह है कि ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।
यह ऑपरेशन 70 से 95 वर्ष की आयु के पांच बुजुर्ग मरीजों के किए हैं। अस्पताल में पहली बार इस विधि का प्रयोग किया है। इसके साथ विशेषज्ञों ने जटिल ऑपरेशन के लिए एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेंजियोपैंक्रिएटोग्राफी (ईआरसीपी) मशीन का ट्रायल भी किया है। ट्रायल में भी सफलता मिली है। ऑपरेशन गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. ब्रिज शर्मा, डॉ. आशीष, डॉ. विशाल बौद्ध, डॉ. राजेश और उनकी टीम ने किए। अस्पताल में इससे पहले इस प्रकार के जटिल ऑपरेशन के लिए विभाग को एंडोस्कोपी की मदद लेनी पड़ती थी। सामान्य प्रक्रिया में भी काफी समय लगता था। वहीं मरीजों को ठीक होने में कई दिन लगते थे और ऑपरेशन के बाद उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था। अब सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। जल्द ही विभाग की ओर से मशीन की खरीद भी की जाएगी। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के लिए निदेशक चिकित्सा शिक्षा को प्रस्ताव भेजा है।
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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में मरीजों के ऑपरेशन का खर्च भी काफी कम हुआ है। पित्त की नली से पथरी निकालने के लिए ईएचएल विधि में करीब दो लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन चिकित्सकों ने यह प्रक्रिया 50 से 60 हजार रुपये में पूरी की है। इससे मरीजों की जेब पर भी कम बोझ पड़ा है।
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क्या है ईएचएल तकनीक
ईएचएल तकनीक का इस्तेमाल बड़ी पथरी को तोड़ने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से पथरी को आसानी से निकाला जा सकता है। इस तकनीक में एक विशेष प्रोब के जरिये पानी या सलाइन के माध्यम से भीतर बिजली की छोटी चिंगारी पैदा की जाती है। इससे पानी में तीव्र शॉकवेव्स यानी तरंगें पैदा होती हैं, जो सीधे पथरी से टकराकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देती है। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन के दौरान बड़ी पथरी को निकालने में काफी दिक्कतें आती हैं। अब अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग कर जटिल प्रकार की पथरी के ऑपरेशन किए जाएंगे।
कोट...
अस्पताल में पांच मरीजों के ईएचएल तकनीक से ऑपरेशन किए हैं। पहली बार अस्पताल में इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें मरीजों का खर्च भी काफी कम आया है। मरीजों को एक दिन विशेषज्ञ की देखरेख में रखने के बाद छुट्टी दे दी गई। ट्रायल के तौर पर पांच ऑपरेशन किए गए हैं।
-डॉ. ब्रिज शर्मा, प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष