इस पवित्र झील में मौजूद है अरबों का खजाना, महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
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हिमाचल के मंडी जनपद के बड़ा देव कमरूनाग के ऐतिहासिक सरानाहुली मेले में शनिवार को करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने देवता के मंदिर में आशीर्वाद लिया। सरानाहुली मेला शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
मेले में इस वर्ष हिमाचल सहित पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं ने भी सरानाहुली मेले में दस्तक दी। सैकड़ों बच्चों के मुंडन संस्कार किए गए तथा बकरों की बलि के विकल्प में नारियल चढ़ाया। कमरूनाग की ऐतिहासिक झील में भी श्रद्धालुओं ने लाखों की नकदी और सोना-चांदी चढ़ाया।
शुक्रवार से कमरूनाग के सरानाहुली मेले में हजारों श्रद्धालु उपस्थित होना शुरू हो गए थे। गोहर उपमंडल के रोहांडा, सरोआधार और धंग्यारा से होकर हजारों श्रद्धालु कमरूनाग पहुंचे। कमरूनाग देवता के गूर लीलमनी ने बताया कि 50 हजार से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
गोहर पुलिस थाना प्रभारी मनोज वालिया ने बताया कि कमरूनाग का सरानाहुली मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है। यह धार्मिक स्थल प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज है। यहां ऊंचे-ऊंचे देवदार के पेड़ और हरी भरी पहाड़ियां श्रद्धालुओं का मन मोह लेती हैं।
झील में अरबों का खजाना, लेकिन कोई भी इसे निकाल नहीं सकता
झील में करोड़ों-अरबों का खजाना है लेकिन कोई भी इसे निकाल नहीं सकता। कहते हैं कि इच्छाधारी नाग इस खजाने की रक्षा करते हैं। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस क्षेत्र में ज्यादातर सांप की तरह दिखने वाले छोटे-छोटे पौधे मिलते हैं।
देव कमरूनाग का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। श्री कृष्ण ने कमरूनाग से उसका सिर मांग लिया था और देव कमरूनाग इच्छा के अनुसार महाभारत का युद्ध देखना चाहते थे।
कमरूनाग झील के रहस्यों को जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। एसडीएम गोहर अनिल भारद्वाज ने बताया कि मेले के आयोजन के पुख्ता प्रबंध कर लिए गए हैं।
मन्नत पूरी हो इसलिए चढ़ाते हैं सिक्के
मंदिर के समीप एक झील है जहां पर मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु सोने, चांदी के जेवर और सिक्के चढ़ाते हैं। यह परंपरा पांडवों के समय से चली आ रही है। कहा जाता है कि जब पांडव देव कमरूनाग से मिलने आए तो उन्होंने भी सोने-चांदी के गहने इस झील में अर्पित किए थे।
इस अद्भुत झील का निर्माण भी पांडवों ने किया है। जब पांडव देव कमरूनाग से मिलने आए थे तो देव कमरूनाग ने कहा कि प्यास लगी है। तब भीम ने धरती पर वार किया और अपने हाथ से पानी की झील प्रकट की। साथ ही जाते समय सारा सोना-चांदी इसी झील में डाल दिया।