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Shimla News: हिमालयी काले भालू के दो शावक किए रेस्क्यू
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वन विभाग एवं वन्य प्राणि प्रभाग ने रेस्क्यू किए दो बेबी ब्लैक बीयर। फोटो संवाद
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मत्याणा के संधु गांव में सेब के बगीचे में मिले, दो दिन खोजने पर भी नहीं मिली मां
वन विभाग ने पुनर्वास केंद्र टुटीकंडी पहुंचाया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। ठियोग उपखंड के मत्याणा के समीप संधु गांव में सेब के बगीचे में मिले एक महीने के दो हिमालयी काले भालू के शावकों को वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र टुटीकंडी पहुंचाया है। शावकों के जोड़े की सूचना लोगों ने वीरवार को वन विभाग को दी थी। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने शावकों को रेस्क्यू किया और उन्हें रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया।
इन शावकों की मां को विभाग ने दो दिनों तक खोजने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद शावकों की कमजोर स्थिति और विशेष देखभाल की आवश्यकता को देखते हुए ठियोग वन कर्मचारियों ने उन्हें तुरंत शिमला के टुटीकंडी स्थित वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र (आरआरसी) में स्थानांतरित कर दिया।
आरआरसी में शावकों का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि वे कमजोर हैं। उन्हें गहन देखभाल व निगरानी की आवश्यकता है। वर्तमान में दोनों शावकों की देखरेख आरआरसी टुटीकंडी में कर्मचारियों द्वारा की जा रही है। शिमला में वन्यजीव प्रभाग के उप वन संरक्षक शाहनवाज भट्ट ने बताया कि टुटीकंडी स्थित बचाव और पुनर्वास केंद्र शिमला वन्यजीव प्रभाग के वन्यजीव विंग के तहत कार्य करता है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र का वन्यजीवों के बचाव और पुनर्वास में सराहनीय इतिहास रहा है।
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उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए वन्यजीवों को आवश्यक उपचार और पुनर्वास के बाद उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ा जाता है। यदि वे रिलीज के लिए अयोग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें केंद्र में आजीवन देखभाल दी जाती है।
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वन विभाग ने पुनर्वास केंद्र टुटीकंडी पहुंचाया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। ठियोग उपखंड के मत्याणा के समीप संधु गांव में सेब के बगीचे में मिले एक महीने के दो हिमालयी काले भालू के शावकों को वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र टुटीकंडी पहुंचाया है। शावकों के जोड़े की सूचना लोगों ने वीरवार को वन विभाग को दी थी। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने शावकों को रेस्क्यू किया और उन्हें रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया।
इन शावकों की मां को विभाग ने दो दिनों तक खोजने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद शावकों की कमजोर स्थिति और विशेष देखभाल की आवश्यकता को देखते हुए ठियोग वन कर्मचारियों ने उन्हें तुरंत शिमला के टुटीकंडी स्थित वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र (आरआरसी) में स्थानांतरित कर दिया।
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आरआरसी में शावकों का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि वे कमजोर हैं। उन्हें गहन देखभाल व निगरानी की आवश्यकता है। वर्तमान में दोनों शावकों की देखरेख आरआरसी टुटीकंडी में कर्मचारियों द्वारा की जा रही है। शिमला में वन्यजीव प्रभाग के उप वन संरक्षक शाहनवाज भट्ट ने बताया कि टुटीकंडी स्थित बचाव और पुनर्वास केंद्र शिमला वन्यजीव प्रभाग के वन्यजीव विंग के तहत कार्य करता है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र का वन्यजीवों के बचाव और पुनर्वास में सराहनीय इतिहास रहा है।
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उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए वन्यजीवों को आवश्यक उपचार और पुनर्वास के बाद उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ा जाता है। यदि वे रिलीज के लिए अयोग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें केंद्र में आजीवन देखभाल दी जाती है।