हिमाचल: ओबीसी प्रमाणपत्र हर साल बनवाने की अनिवार्यता होगी खत्म, सरकार ने बैठक में दिया आश्वासन
ओबीसी कल्याण बोर्ड की 13वीं बैठक में सरकार ने इस मुद्दे पर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। गुरुवार को राज्य सचिवालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओबीसी वर्ग से जुड़ी विभिन्न मांगों और सुझावों पर चर्चा हुई।
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हिमाचल प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को हर साल प्रमाणपत्र बनवाने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। ओबीसी कल्याण बोर्ड की 13वीं बैठक में सरकार ने इस मुद्दे पर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। गुरुवार को राज्य सचिवालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओबीसी वर्ग से जुड़ी विभिन्न मांगों और सुझावों पर चर्चा हुई। बैठक में ओबीसी प्रमाणपत्र को हर वर्ष बनवाने की व्यवस्था को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि इस अनिवार्यता के दृष्टिगत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही बोर्ड की ओर से रखी गई अन्य मांगों और सुझावों पर भी सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया।
डॉ. शांडिल ने कहा कि राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर कांग्रेस की सरकारें हमेशा ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही हैं। उनके अनुसार कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही पंचायतों, नगर निकायों और नगर निगमों में आरक्षण की व्यवस्था शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत के अनुसार इस व्यवस्था में वांछित सुधार किए जाएंगे। मंत्री ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ओबीसी वर्ग के कल्याण के प्रति समर्पित बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले चार वर्षों में स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय सहित विभिन्न क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराई है।
बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने ओबीसी वर्ग से जुड़े कौशल क्षेत्र के लोगों के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा संस्थानों में ऐसे समुदायों को आरक्षण की सुविधा देने पर विचार करेगी, जो परंपरागत रूप से कौशल आधारित कार्यों से जुड़े हैं। विशेष रूप से मंदिर निर्माण का कार्य करने वाले समुदायों को तकनीकी शिक्षा संस्थानों में आरक्षण देने की संभावना पर विचार करने की बात कही गई। इससे पारंपरिक कौशल से जुड़े समुदायों के युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में नया रास्ता खुल सकता है।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ओबीसी वर्ग के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। बैठक में मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना, डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना और इंदिरा गांधी सुख सम्मान निधि योजना जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ मिल रहा है। राजेश धर्माणी ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में त्रि-स्तरीय पंचायती व्यवस्था में आरक्षण की शुरुआत हुई। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत का भी उल्लेख किया। बैठक में मुख्य सचिव केके पंत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सीपी वर्मा, निदेशक ईसोमसा सुमित खिमटा, ओबीसी कल्याण बोर्ड के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।