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नहीं सुलझी वीरभद्र और सुक्खू के बीच की जंग, अब राहुल के लौटने का इंतजार

Sun, 03 Sep 2017 02:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 03 Sep 2017 02:47 PM IST
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Tug of war between Virbhadra singh and Sukhwinder singh sukhu.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सोनिया के दरबार में हाजिरी से कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान सुलझती नहीं दिख रही। सुक्खू को हटाकर पसंद का प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्त करने पर हाईकमान ने सस्पेंस बरकरार रखा है।

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दिल्ली से लौटकर मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं लड़ने का मन बदलने लगा है, लेकिन सुक्खू को लेकर उनकी राय नहीं बदली है। उधर, लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू की सरकार को लेकर चुप्पी के मायने निकाले जा रहे हैं।
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सूत्रों की मानें तो सुक्खू भी पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से टच में हैं। इसी के चलते उन्हें भी कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली है। प्रदेश संगठन की कार्यकारिणी में वीरभद्र खेमे के कई खास मौजूद हैं,
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लेकिन मौके की नजाकत को भांपते हुए बयानबाजी से बच रहे हैं। सीएम की सोनिया से मुलाकात के बाद अब दोनों कैंप राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के दिल्ली लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

नरम पड़े सीएम वीरभद्र के तेवर

Tug of war between Virbhadra singh and Sukhwinder singh sukhu.

चुनाव नहीं लड़ने का एलान करने के बाद वीरभद्र सिंह का दिल्ली दौरा बेहद अहम माना जा रहा था। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में पहले सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से मुलाकात कर संगठन सरकार के बीच पैदा हुए हालात पर चर्चा की।

पटेल से हिमाचल कांग्रेस के अंदरूनी हालात को जानने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मुख्यमंत्री से मिलीं। दोनों के बीच हुई बैठक को लेकर सियासी कयासबाजी तेज है, लेकिन दौरे से पहले वीरभद्र के तीखे तेवर कुछ नरम पड़े हैं।

माना जा रहा है कि चुनावी वर्ष में सीएम और सुक्खू के बीच मतभेद से हाईकमान भी खुश नहीं है। ऐसा लगता है कि राहुल गांधी के विदेश और शिंदे के महाराष्ट्र से लौटने पर ही स्थिति साफ हो पाएगी। वीरभद्र सिंह के पक्ष में हाईकमान को भेजे ई-मेल और पत्रों के बीच पीसीसी अध्यक्ष सुक्खू खेमे की चुप्पी बरकरार है।

सुक्‍खू ने बयानबाजी से बनाई दूरी

Tug of war between Virbhadra singh and Sukhwinder singh sukhu.

शिंदे के प्रदेश प्रभारी बनाने के बाद सुक्खू खेमे ने अपना वर्किंग स्टाइल बदला है। सुक्खू बयानबाजी से दूरी बनाए हैं और उनके करीबी मंत्री-विधायक चुपचाप मामले पर नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों की मानें तो सुक्खू भी दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क में हैं।

मुख्यमंत्री की बयानबाजी का फीडबैक भी सुक्खू खेमा दिल्ली पहुंचा रहा है कि संगठन सरकार में मतभेद पर केवल वीरभद्र और उनके समर्थक मुखर हैं। दोनों खेमों से किसकी रणनीति कारगर साबित होती है, इस पर विरोधी दलों की भी नजर है।

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