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थायराइड के टेस्ट बंद, मरीज परेशान
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शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में मरीजों के थॉयराइड टेस्ट नहीं हो रहे हैं। अस्पताल में करीब एक माह से यह टेस्ट बंद है। ऐसे में प्रदेशभर से इलाज के लिए आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं
बताया जा रहा है कि अस्पताल में टेस्ट किट नहीं है। लिहाजा मरीजों को इस टेस्ट को करवाने के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में जहां यह टेस्ट 160 से 165 रुपये में होता है, वहीं अब मरीजों को निजी लैबों में 300 से 500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। मरीजों को आ रही इस परेशानी का हल नहीं निकाल पाया है।
आईजीएमसी की मेडिसन, सर्जरी समेत अन्य विभागों की ओपीडी में जांच के बाद चिकित्सक कई मरीजों को इस टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। अस्पताल की सरकारी लैब में यह टेस्ट सस्ती दरों पर किए जाते हैं, लेकिन निजी लैबों में मरीजों को महंगी दरों पर यह टेस्ट करवाना पड़ रहा है। हालांकि, आर्थिक तौर से संपन्न मरीज तो निजी लैबों में यह टेस्ट करवा रहे हैं, लेकिन गरीब मरीजों के पास इंतजार के सिवाय कोई चारा नहीं है। उधर, आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि टेस्ट क्यों नहीं हो पा रहे हैं, इस बारे में विभागाध्यक्ष से जानकारी ली जाएगी।
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लैब में करवाना होता है एक टेस्ट, बना देते पैकेज
शिमला। आईजीएमसी में थॉयरायड टेस्ट न होने से मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। मरीज जब इस टेस्ट को करवाने निजी लैब जाते हैं तो निजी लैब संचालक उन्हें इस टेस्ट के साथ फुल बॉडी टेस्ट करवाने की सलाह देते है। इसमें यह लैब संचालक करीब 1100 रुपये के पैकेज में थॉयरायड टेस्ट के साथ किडनी, पीलिया, हार्ट, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और एचबी टेस्ट करने की सलाह देते हैं। हालांकि, कुछ लोग तो यह सभी टेस्ट करने में राजी हो जाते हैं, लेकिन गरीब तबके के लोग फुल बॉडी टेस्ट करवाने में संकोच कर रहे हैं।
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बताया जा रहा है कि अस्पताल में टेस्ट किट नहीं है। लिहाजा मरीजों को इस टेस्ट को करवाने के लिए निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में जहां यह टेस्ट 160 से 165 रुपये में होता है, वहीं अब मरीजों को निजी लैबों में 300 से 500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। मरीजों को आ रही इस परेशानी का हल नहीं निकाल पाया है।
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आईजीएमसी की मेडिसन, सर्जरी समेत अन्य विभागों की ओपीडी में जांच के बाद चिकित्सक कई मरीजों को इस टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। अस्पताल की सरकारी लैब में यह टेस्ट सस्ती दरों पर किए जाते हैं, लेकिन निजी लैबों में मरीजों को महंगी दरों पर यह टेस्ट करवाना पड़ रहा है। हालांकि, आर्थिक तौर से संपन्न मरीज तो निजी लैबों में यह टेस्ट करवा रहे हैं, लेकिन गरीब मरीजों के पास इंतजार के सिवाय कोई चारा नहीं है। उधर, आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि टेस्ट क्यों नहीं हो पा रहे हैं, इस बारे में विभागाध्यक्ष से जानकारी ली जाएगी।
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लैब में करवाना होता है एक टेस्ट, बना देते पैकेज
शिमला। आईजीएमसी में थॉयरायड टेस्ट न होने से मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। मरीज जब इस टेस्ट को करवाने निजी लैब जाते हैं तो निजी लैब संचालक उन्हें इस टेस्ट के साथ फुल बॉडी टेस्ट करवाने की सलाह देते है। इसमें यह लैब संचालक करीब 1100 रुपये के पैकेज में थॉयरायड टेस्ट के साथ किडनी, पीलिया, हार्ट, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और एचबी टेस्ट करने की सलाह देते हैं। हालांकि, कुछ लोग तो यह सभी टेस्ट करने में राजी हो जाते हैं, लेकिन गरीब तबके के लोग फुल बॉडी टेस्ट करवाने में संकोच कर रहे हैं।