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अरे ये क्या! धंसने लगा गांव

Mon, 14 Apr 2014 03:59 PM IST
रमेश नेगी/ अमर उजाला, रिकांगपिओ (किन्नौर)
रमेश नेगी/ अमर उजाला, रिकांगपिओ (किन्नौर) Updated Mon, 14 Apr 2014 03:59 PM IST
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the village of Kinnaur is on the edge of Subsidence

जनजातीय जिला किन्नौर के निचार में दुनों के पास लगातार जमीन के धंसने से लोग दहशत में हैं। जमीन धंसने के जहां लोगों के सेब के पौधों को नुकसान हो रहा है।

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पहाड़ी पर बने घरों को भी खतरा बना हुआ है। डर के मारे क्षेत्र के लोग अब देवता की शरण में पहुंच गए हैं। लोगों ने देवता नाराणेस से गांव को बचाने की गुहार लगाई है।
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हिमाचल की परम्परा के अनुसार ग्रामीणों ने देवता के आदेश पर दुनों नामक स्थान पर जाकर पूजा पाठ किया। उनसे गांव की रक्षा करने की सामुहिक प्रार्थना की गई।

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4 फीट तक धंस चुकी है जमीन

the village of Kinnaur is on the edge of Subsidence

लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से निचार गांव के दुनों में जमीन 4 फीट तक धंस चुकी है। इस कारण पहाड़ों से चट्टानें गिरने का भी खतरा बना हुआ है। इस गांव में सेब के बाग हैं। वह भी धंस रहे हैं।

गांव के लगभग 400 लोग डर के साये में जी रहे हैं। निचार के दुनों, पूजे, ग्रांदे और काश्पों के ग्रामीण देवता की शरण में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाथपा झाकड़ी बिजली परियोजना के कारण गांव के घरों व जमीन में दरारें पड़ रही हैं।

इस गांव के नीचे परियोजना के तहत चार चैम्बर बने हैं। गांव के कारदार धर्म पाल , मोतमी, जसवंत, कायथ परमानंद, सुजारी, भंडारी गोबिंद, कपिल देव, सत्य प्रकाश, अनिल, जग दयाल, ठाकुर सिंह, सुना सिंह और राज कु मारी आदि ने मांग की है कि समय रहते समस्या को हल किया जाए।

चंडीगढ़ से भू वैज्ञानिकों की टीम बुलाई

the village of Kinnaur is on the edge of Subsidence

इस गंभीर मामले को देखते हुए जिला प्रशासन ने चंडीगढ़ से भू वैज्ञानिकों की टीम बुलाई है। भावानगर मेें तैनात एसडीएम विवेक भाटिया ने अमर उजाला को बताया कि टीम 2-3 दिन में इस गांव में पहुंच जाएगी। टीम जमीन धंसने के कारणों का पता लगाएगी।  उन्होंने कहा अभी राजस्व विभाग दुनों में लोगों को हुए नुकसान की रिर्पाट तैयार कर रहा है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।

-अभी तक किन्नौर में किसी गांव के धंसने की सूचना नहीं है। अगर जानकारी आती है तो वहां पर एक टीम भेजी जाएगी। टीम पूरे मामले का अध्ययन करेगी कि क्यों पहाड़ धंस रहा है। (डा. एसएस नेगी, निदेशक पर्यावरण एवं विज्ञान तकनीकी विभाग)

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