भाई को खूंखार तेंदुए से बचाया, अब स्कूलों में पढ़ाई जा रही इनकी बहादुरी की कहानी
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बहादुर बहन ने भाई को खूखार तेंदुए से बचाया और अब इनकी बहादुरी की कहानी स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई है। भाई को खूंखार तेंदुए से बचाने वाली बहादुर बहन शिल्पा की कहानी वर्तमान में स्कूली बच्चों को पढ़ाई जा रही है।
शिक्षा बोर्ड ने शिल्पा की कहानी को तीसरी कक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है जिसे पढ़ाते समय शिक्षक बच्चों को बहादुरी की कहानी सुनाते हैं। दिल्ली में वीरता पुरस्कार से सम्मानित शिल्पा को प्रशासन और सरकार विभिन्न कार्यक्रमों में आज भी सम्मानित करते हैं।
शिल्पा के पिता राकेश शर्मा ने बताया कि शिल्पा को प्रदेश में भी 26 जनवरी और 15 अगस्त के कार्यक्रमों के दौरान कई बार सम्मानित किया गया। जिस समय उसने अपने भाई को बचाया था उस वक्त शिल्पा की उम्र 14 वर्ष थी और वह 9वीं कक्षा में पढ़ती थी। वर्तमान में शिल्पा बी फार्मेसी की पढ़ाई कर रही है।
यहां जानिए शिल्पा की बहादुरी का पूरा सच
बिलासपुर जिले की बपराल पंचायत के गांव बड़ौन में खूंखार तेंदुआ कई लोगों पर हमला कर चुका था। तेंदुए से पूरा इलाका आतंकित था। 27 अक्तूबर 2012 को शिल्पा अपने भाई के साथ स्कूल जा रही थी।
सुबह करीब आठ बजे घर से कुछ ही दूरी पर पहले से घात लगाए तेंदुए ने शिल्पा के भाई पर हमला कर दिया। शिल्पा निडर होकर तेंदुए से भिड़ गई। तेंदुए से गुत्थमगुत्था हुई शिल्पा ने शोर भी मचाया जिसे सुनकर और लोग मौके पर पहुंचे। आखिरकार उसने तेंदुए से भाई को छुड़ा लिया।