मेले में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने खुद किया मंत्रोच्चारण, डलवाई आहुतियां
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ओम भूर्भुव: स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं.... के वैदिक मंत्रोच्चारण से शुक्रवार को धार्मिक स्थल श्री रेणुकाजी गूंज उठा। विश्व शांति के लिए मंत्रों का उच्चारण मुख्यातिथि राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्वयं किया। माइक के समक्ष उन्होंने मंत्रोच्चारण किया और यज्ञ में आहुतियां भी डलवाईं।
इससे श्री रेणुकाजी का वातावरण भक्तिरस में डूब गया। राज्यपाल आचार्य देवव्रत शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय रेणुका उत्सव के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। श्री रेणुकाजी में पहुंचे आचार्य देवव्रत ने सर्वप्रथम श्री रेणुकाजी और भगवान परशुराम के दर्शन किए।
इसके पश्चात भगवान परशुराम के प्राचीन मंदिर (देवठी) में विश्व शांति के लिए वैदिक मंत्रों के साथ हवन यज्ञ किया। उन्होंने देव पालकियों को कंधा भी दिया। परंपरा के अनुसार भगवान परशुराम सहित अन्य देवता मां रेणुका से विदाई के बाद प्रस्थान कर गए।
ईश्वर के चित्र की नहीं, चरित्र की करें पूजा : आचार्य
राज्यपाल ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर उपस्थित विधायक विनय कुमार, उपायुक्त ललित जैन समेत अधिकारियों और अन्य लोगों से आहुतियां भी डलवाईं। वहीं, गायत्री मंत्र का जाप किया। इन मंत्रों के जाप से वातावरण शुद्ध हो गया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा है कि भगवान परशुराम एक महान योद्धा एवं प्रकांड विद्वान थे। उन्होंने वेद की रक्षा और लोगों को सद्मार्ग पर चलने का ज्ञान दिया। हमें ईश्वर के चित्र की नहीं, बल्कि उनके चरित्र की पूजा करनी चाहिए।
उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। प्रदेश की धरती को स्वच्छ एवं नशामुक्त बनाना है। इसके लिए सभी लोगों को अपना सहयोग देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि विशेष शिविरों का आयोजन करके लोगों को जीरो बजट प्राकृतिक खेती को लेकर प्रशिक्षित किया जाएगा।