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हिमाचल: अवैध निर्माण पर तलब किए अधिकारी, छह मंजिल से ऊपर निर्माण की जांच के आदेश, सरकार से मांगी रिपोर्ट

Thu, 27 Aug 2026 04:09 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 27 Aug 2026 04:09 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने प्रदेश में बिना ठोस योजना के हो रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण और पर्यावरण क्षति पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के सचिव अमरजीत सिंह और निदेशक हेंसी नेगी को अगली सुनवाई पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। 

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Himachal High Court takes a strict stance on the construction of illegal multi-storey buildings in Barog and s
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश में बिना ठोस योजना के हो रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण और पर्यावरण क्षति पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के सचिव अमरजीत सिंह और निदेशक हेंसी नेगी को अगली सुनवाई पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सरकार से आदेश के बाद जारी किए गए स्टॉप कंस्ट्रक्शन ऑर्डर्स की सूची मांगी है, ताकि अनुपालन का पता चल सके। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि कृषि और वन भूमि को समतल करके बाहरी बिल्डरों की ओर से बहुमंजिला इमारतें कैसे खड़ी की जा रही हैं। कोर्ट ने पूछा कि क्या यह एचपी टेनेंसी एक्ट के नियमों का उल्लंघन तो नहीं है, जिसके तहत गैर-हिमाचली और गैर-कृषक व्यक्ति सीधे कृषि भूमि नहीं खरीद सकते। सक्षम प्राधिकारी को इस पूरी प्रक्रिया और चल रही जांच पर विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

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ढुलमुल कार्यप्रणाली पर अदालत ने असंतोष जताया
वहीं, राज्य सरकार की ओर से रीजनल प्लान तैयार करने के लिए मांगे गए 18 महीने के अतिरिक्त समय और ढुलमुल कार्यप्रणाली पर अदालत ने असंतोष जताया है। कोर्ट ने सरकार से स्टॉप कंस्ट्रक्शन ऑर्डर्स की पूरी सूची मांगी है, ताकि यह देखा जा सके कि कोर्ट के आदेशों का पालन जमीनी स्तर पर हुआ है या नहीं। सरकार ने क्षेत्र विकास योजनाओं के लिए समय बढ़ाने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने पाया कि इसमें कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है। शिमला, कांगड़ा और कुल्लू की योजनाओं को अभी प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिलना बाकी है, जबकि मंडी, सोलन, चंबा और नाहन के प्लान मार्च 2027 तक पूरे होने की बात कही गई है। हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि देश की सर्वोच्च अदालत भी एक अलग रिट याचिका में हिमाचल प्रदेश की नाजुक पारिस्थितिकी, भारी मशीनरी के उपयोग और अवैध निर्माणों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है। पहाड़ियों के संरक्षण व कटाई से जुड़ी नीति के लिए कोर ग्रुप का गठन केवल 30 जून 2026 को ही किया गया है और अंतिम ड्राफ्ट नीति बनना अभी बाकी है।

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सोलन और बड़ोग क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण बरकरार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिले के बड़ोग और आसपास की पहाड़ियों पर धड़ल्ले से हो रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि 11 मई 2026 और 10 जुलाई 2026 के आदेशों में 6 मंजिल से अधिक निर्माण पर रोक लगाई गई थी। अदालत में प्रस्तुत तस्वीरों से खुलासा हुआ कि 2015 से 2026 के दौरान सोलन के खील जाशली, कैंथरी और कोरों क्षेत्रों में अवैध रूप से 9-9 मंजिलों की इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।

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