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Shimla News: सांगटी में कूड़ा उठाने की व्यवस्था चौपट, हर रोज नहीं आती गाड़ी
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कॉमन इंट्रो
सांगटी में हजारों विद्यार्थी किराये के कमरों और पीजी में रहते हैं, लेकिन यहां कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था नाकाफी है। न तो रोजाना कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी आती है और न ही घरों से कचरा एकत्र किया जाता है। सालों से पहाड़ियों और जंगलों में कचरा फेंका जा रहा है। पंचायत ने संसाधनों की कमी को बड़ी समस्या बताया है। संवाददाता हर्षित ने मौके का जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट:-
जंगलों में लगे हैं कूड़े के ढेर, पंचायत के पास संसधान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के समरहिल स्थित सांगटी में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था स्थानीय लोगों के साथ यहां रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है।
क्षेत्र में बड़ी संख्या में दूसरे स्थानों से पढ़ाई करने आए छात्र किराये के कमरों और पीजी में रहते हैं। इसके बावजूद यहां न तो रोजाना कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी आती है और न ही घरों से कचरा एकत्र करने की व्यवस्था है। ऐसे में विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों के सामने कचरे के निपटारे की समस्या बनी हुई है। विद्यार्थियों की बड़ी आबादी होने के कारण क्षेत्र में रोजाना काफी मात्रा में घरेलू कचरा निकलता है। इसमें खाने-पीने की वस्तुओं के पैकेट, प्लास्टिक और अन्य घरेलू अपशिष्ट शामिल हैं। नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को कचरा जमा करके रखना पड़ता है या उसके निपटारे के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ते हैं। पर्याप्त कूड़ेदान नहीं होने से समस्या और गंभीर हो जाती है।
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स्थानीय स्तर पर लंबे समय से कचरे के उचित निपटारे की व्यवस्था नहीं होने के कारण पहाड़ियों और जंगलों में कूड़ा फेंके जाने की समस्या बनी हुई है। इससे आसपास के प्राकृतिक वातावरण और स्वच्छता पर असर पड़ने की आशंका है। जंगलों में फेंका गया प्लास्टिक और अन्य कचरा वन्यजीवों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। क्षेत्र में विद्यार्थियों की बड़ी आबादी को देखते हुए कचरा एकत्र करने और उसके उचित निपटारे की व्यवस्था करना जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से कूड़ा उठाने, घरों से कचरा एकत्र करने और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान लगाने की आवश्यकता है। पंचायत प्रधान चमन लाल ने कहा कि पंचायत के पास कूड़ा उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। संसाधनों की कमी के कारण नियमित व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है।
समस्या का हो स्थायी समाधान : आयूष
काॅलेज छात्र आयुष ने कहा कि यहां रोजाना कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी नहीं आती। कमरे में कचरा जमा होने लगता है तो समझ नहीं आता कि इसे कहां डालें। कई बार कई दिनों तक कचरा अपने पास ही रखना पड़ता है। इससे कमरे में बदबू फैलने की परेशानी भी होती है।
नियमित रूप से आए गाड़ी : अखिल
अखिल हम किराये के कमरे में रहते हैं, लेकिन घर से कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। हर दिन निकलने वाले कचरे को ठिकाने लगाना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है। अगर नियमित रूप से गाड़ी आए और घरों से कचरा उठाया जाए तो सभी को सुविधा मिलेगी।
सांगटी में रहते हैं बहुत से छात्र : आदित्य
आदित्य ने कहा कि सांगटी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं। इसके बावजूद न तो पर्याप्त कूड़ेदान हैं और न ही नियमित सफाई की व्यवस्था दिखाई देती है। यहां रहने वाले छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कचरा प्रबंधन के इंतजाम किए जाने चाहिए। इससे क्षेत्र में गंदगी फैलने से भी बचा जा सकेगा।
गंदगी से बीमारियों का खतरा : लक्ष्य
लक्ष्य ने कहा कि कचरा खुले में फेंकने से आसपास गंदगी फैलती है और जंगलों को भी नुकसान पहुंचता है। हर व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह कचरे के निपटारे के लिए दूर तक जाए। पंचायत और संबंधित विभाग को मिलकर नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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सांगटी में हजारों विद्यार्थी किराये के कमरों और पीजी में रहते हैं, लेकिन यहां कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था नाकाफी है। न तो रोजाना कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी आती है और न ही घरों से कचरा एकत्र किया जाता है। सालों से पहाड़ियों और जंगलों में कचरा फेंका जा रहा है। पंचायत ने संसाधनों की कमी को बड़ी समस्या बताया है। संवाददाता हर्षित ने मौके का जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट:-
जंगलों में लगे हैं कूड़े के ढेर, पंचायत के पास संसधान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के समरहिल स्थित सांगटी में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था स्थानीय लोगों के साथ यहां रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है।
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क्षेत्र में बड़ी संख्या में दूसरे स्थानों से पढ़ाई करने आए छात्र किराये के कमरों और पीजी में रहते हैं। इसके बावजूद यहां न तो रोजाना कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी आती है और न ही घरों से कचरा एकत्र करने की व्यवस्था है। ऐसे में विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों के सामने कचरे के निपटारे की समस्या बनी हुई है। विद्यार्थियों की बड़ी आबादी होने के कारण क्षेत्र में रोजाना काफी मात्रा में घरेलू कचरा निकलता है। इसमें खाने-पीने की वस्तुओं के पैकेट, प्लास्टिक और अन्य घरेलू अपशिष्ट शामिल हैं। नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को कचरा जमा करके रखना पड़ता है या उसके निपटारे के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ते हैं। पर्याप्त कूड़ेदान नहीं होने से समस्या और गंभीर हो जाती है।
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स्थानीय स्तर पर लंबे समय से कचरे के उचित निपटारे की व्यवस्था नहीं होने के कारण पहाड़ियों और जंगलों में कूड़ा फेंके जाने की समस्या बनी हुई है। इससे आसपास के प्राकृतिक वातावरण और स्वच्छता पर असर पड़ने की आशंका है। जंगलों में फेंका गया प्लास्टिक और अन्य कचरा वन्यजीवों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। क्षेत्र में विद्यार्थियों की बड़ी आबादी को देखते हुए कचरा एकत्र करने और उसके उचित निपटारे की व्यवस्था करना जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से कूड़ा उठाने, घरों से कचरा एकत्र करने और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान लगाने की आवश्यकता है। पंचायत प्रधान चमन लाल ने कहा कि पंचायत के पास कूड़ा उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। संसाधनों की कमी के कारण नियमित व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है।
समस्या का हो स्थायी समाधान : आयूष
काॅलेज छात्र आयुष ने कहा कि यहां रोजाना कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी नहीं आती। कमरे में कचरा जमा होने लगता है तो समझ नहीं आता कि इसे कहां डालें। कई बार कई दिनों तक कचरा अपने पास ही रखना पड़ता है। इससे कमरे में बदबू फैलने की परेशानी भी होती है।
नियमित रूप से आए गाड़ी : अखिल
अखिल हम किराये के कमरे में रहते हैं, लेकिन घर से कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। हर दिन निकलने वाले कचरे को ठिकाने लगाना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है। अगर नियमित रूप से गाड़ी आए और घरों से कचरा उठाया जाए तो सभी को सुविधा मिलेगी।
सांगटी में रहते हैं बहुत से छात्र : आदित्य
आदित्य ने कहा कि सांगटी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं। इसके बावजूद न तो पर्याप्त कूड़ेदान हैं और न ही नियमित सफाई की व्यवस्था दिखाई देती है। यहां रहने वाले छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कचरा प्रबंधन के इंतजाम किए जाने चाहिए। इससे क्षेत्र में गंदगी फैलने से भी बचा जा सकेगा।
गंदगी से बीमारियों का खतरा : लक्ष्य
लक्ष्य ने कहा कि कचरा खुले में फेंकने से आसपास गंदगी फैलती है और जंगलों को भी नुकसान पहुंचता है। हर व्यक्ति से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह कचरे के निपटारे के लिए दूर तक जाए। पंचायत और संबंधित विभाग को मिलकर नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था करनी चाहिए।