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Shimla News: आईजीएमसी के एनेस्थीसिया विभाग में डॉक्टरों के 27 पद रिक्त
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फैकल्टी के छह और एसआर के 21 पद रिक्त, एनएमसी के नियमों के अनुसार नहीं मिल रहे फैकल्टी चिकित्सक
चिकित्सकों की कमी के चलते पड़ रहा अतिरिक्त भार
तीन अस्पतालों में होते हैं ऑपरेशन, शिक्षण कार्य प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के एनेस्थीसिया विभाग में सीनियर रेजिडेंट (एसआर) और फैकल्टी चिकित्सकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि एसआर के 24 पदों में से केवल तीन पर ही चिकित्सक तैनात हैं, जबकि 21 पद रिक्त हैं।
वहीं फैकल्टी के 28 पदों में से छह खाली हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, एमबीबीएस और अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और कार्यरत चिकित्सकों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। आईजीएमसी प्रदेश का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की कमी कभी भी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। अस्पताल में आपात स्थिति में मरीज रेफर होकर पहुंचते हैं। ऐसे में यहां 24 घंटे ऑपरेशन थियेटर संचालित रहते हैं। इसके अलावा, अस्पताल में करीब 15 मेजर ऑपरेशन थियेटर हैं, जहां एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की आवश्यकता रहती है।
आईजीएमसी के साथ कमला नेहरू अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा में भी ऑपरेशन थियेटरों के संचालन के लिए एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की जरूरत होती है। ऐसे में इन चिकित्सकों पर काम का दबाव बढ़ जाता है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के कार्य का दायरा भी बढ़ गया है। अब बच्चों की एमआरआई करवाने के लिए भी कई बार एनेस्थीसिया देना पड़ता है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा।
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चिकित्सकों की कमी के चलते पड़ रहा अतिरिक्त भार
तीन अस्पतालों में होते हैं ऑपरेशन, शिक्षण कार्य प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के एनेस्थीसिया विभाग में सीनियर रेजिडेंट (एसआर) और फैकल्टी चिकित्सकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि एसआर के 24 पदों में से केवल तीन पर ही चिकित्सक तैनात हैं, जबकि 21 पद रिक्त हैं।
वहीं फैकल्टी के 28 पदों में से छह खाली हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, एमबीबीएस और अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और कार्यरत चिकित्सकों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। आईजीएमसी प्रदेश का प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है। यहां एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की कमी कभी भी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। अस्पताल में आपात स्थिति में मरीज रेफर होकर पहुंचते हैं। ऐसे में यहां 24 घंटे ऑपरेशन थियेटर संचालित रहते हैं। इसके अलावा, अस्पताल में करीब 15 मेजर ऑपरेशन थियेटर हैं, जहां एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की आवश्यकता रहती है।
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आईजीएमसी के साथ कमला नेहरू अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा में भी ऑपरेशन थियेटरों के संचालन के लिए एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की जरूरत होती है। ऐसे में इन चिकित्सकों पर काम का दबाव बढ़ जाता है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के कार्य का दायरा भी बढ़ गया है। अब बच्चों की एमआरआई करवाने के लिए भी कई बार एनेस्थीसिया देना पड़ता है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि रिक्त पदों को जल्द भरा जाएगा।
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