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Shimla News: ‘रसिक संपादक’ को देखकर दर्शकों ने खूब लगाए ठहाके
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नाटक से दिया मन की खूबसूरती का संदेश
कलाकारों का दमदार अभिनय देख लोटपोट हुए दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला के गेयटी थियेटर के गौथिक हॉल में मंगलवार को तीन दिवसीय शिमला थियेटर महोत्सव शुरू हो गया। इसका आयोजन प्लेटफॉर्म शिमला और भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वाधान में रंग निर्देशक स्वर्गीय देवेन जोशी की स्मृति में किया जा रहा है।
महोत्सव में पहले दिन शाम 5:30 बजे प्लेटफॉर्म संस्था रंगविशारद थियेटर क्लब ने ‘रसिक संपादक’ नाटक का मंचन किया। यह कहानी मुंशी प्रेमचंद के शुरुआती दिनों पर आधारित है। यह उन कहानियों में से है जिसका मंच पर कभी मंचन नहीं किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन वीणा शर्मा ने किया है। नाटक की शुरुआत एक हास्य व्यंग्य से होती है जिसमें एक संपादक की ऐसी मानसिकता को दिखाया है जो स्त्रियों को सिर्फ खूबसूरती के पैमाने तक सीमित रखता है। इसमें दिखाया कि स्त्रियों को उनकी खूबसूरती नहीं बल्कि उनके काम और विचारों के आधार पर देखना चाहिए। नाटक के अंत में लोगों को हास्य और व्यंग्य के साथ तन की जगह मन की खूबसूरती देखने का संदेश दिया। हास्य व्यंग्य पर दर्शक हंस-हंसकर लोटपोट हो गए। नाटक में गौरव ग्रोवर, अमन, कामाक्षी, शोभा भसीन, सलोनी, नितुस्मिता, मोहम्मद साजिद और संपादक की भूमिका मोहम्मद साजिद ने निभाई। कहानी का नाट्य रूपांतरण सुशील शर्मा ने किया। इसके अलावा लाइट रूपेश भीमटा और संगीत संचालन लव तोमर ने किया।
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कलाकारों का दमदार अभिनय देख लोटपोट हुए दर्शक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला के गेयटी थियेटर के गौथिक हॉल में मंगलवार को तीन दिवसीय शिमला थियेटर महोत्सव शुरू हो गया। इसका आयोजन प्लेटफॉर्म शिमला और भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वाधान में रंग निर्देशक स्वर्गीय देवेन जोशी की स्मृति में किया जा रहा है।
महोत्सव में पहले दिन शाम 5:30 बजे प्लेटफॉर्म संस्था रंगविशारद थियेटर क्लब ने ‘रसिक संपादक’ नाटक का मंचन किया। यह कहानी मुंशी प्रेमचंद के शुरुआती दिनों पर आधारित है। यह उन कहानियों में से है जिसका मंच पर कभी मंचन नहीं किया गया। इस नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन वीणा शर्मा ने किया है। नाटक की शुरुआत एक हास्य व्यंग्य से होती है जिसमें एक संपादक की ऐसी मानसिकता को दिखाया है जो स्त्रियों को सिर्फ खूबसूरती के पैमाने तक सीमित रखता है। इसमें दिखाया कि स्त्रियों को उनकी खूबसूरती नहीं बल्कि उनके काम और विचारों के आधार पर देखना चाहिए। नाटक के अंत में लोगों को हास्य और व्यंग्य के साथ तन की जगह मन की खूबसूरती देखने का संदेश दिया। हास्य व्यंग्य पर दर्शक हंस-हंसकर लोटपोट हो गए। नाटक में गौरव ग्रोवर, अमन, कामाक्षी, शोभा भसीन, सलोनी, नितुस्मिता, मोहम्मद साजिद और संपादक की भूमिका मोहम्मद साजिद ने निभाई। कहानी का नाट्य रूपांतरण सुशील शर्मा ने किया। इसके अलावा लाइट रूपेश भीमटा और संगीत संचालन लव तोमर ने किया।
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