राजपथ पर दिखेगी महात्मा गांधी की शिमला यात्राओं की झांकी
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गणतंत्र दिवस पर इस बार नई दिल्ली राजपथ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शिमला की एक दर्जन यात्राओं के विवरण की झांकी दिखेगी। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस झांकी को मंजूरी दी गई है। अब विभाग की ओर से 14 दिसंबर शुक्रवार को फाइनल मॉडल रक्षा मंत्रालय को दिल्ली भेजा जा रहा है।
बीते वर्ष 2017 में हिमाचल सरकार ने 26 जनवरी को लाहौल-स्पीति के एक हजार साल पुराने कीह मठ की झांकी भेजी थी, जिसे खूब सराहा गया था। अब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को मद्देनजर रखते हुए उनकी शिमला यात्रा की झांकी भेजी जा रही है।
गांधी की शिमला यात्राएं खूब चर्चित रही
गांधी की शिमला यात्राएं खूब चर्चित रही हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी शिमला आकर उनके यहां आगमन के बारे में पूछते हैं। यहीं नहीं, शिमला में उन्होंने कई सभाएं भी कीं। 24 जून, 1945 को गांधी की शिमला यात्रा के दौरान वह समरहिल स्थित मेनरविला में ठहरे थे।
उनके ठहरने के बाद यह कोठी चर्चा में रही है। महात्मा गांधी का यहां 23 दिन का प्रवास था। उनकी 10 दिनों की यात्रा में यह सबसे बड़ा प्रवास रहा। वह उस समय शिमला सम्मेलन में बतौर सलाहकार शामिल हुए थे। सरकार की ओर से पेश की जा रही झांकी में भी इसका उल्लेख होगा।
1921 में ईदगाह में किया था जन संबोधन
15 मई 1921 शिमला के इतिहास में एक यादगार तारीख है। उस दिन रविवार सुबह गांधी ने ईदगाह (वर्तमान लक्कड़ बाजार बस अड्डे से ठीक नीचे रुल्दूभट्टा) में 15 हजार लोगों को संबोधित किया था। वहां आज भी पर्यटकों को जाते देखा जा सकता है।
केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की ओर से महात्मा गांधी की शिमला यात्रा की झांकी स्वीकृति हुई है। शुक्रवार को झांकी का मॉडल मंत्रालय की टीम को भेजा जा रहा है।
- केके शर्मा, निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग