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शिंदे फिर पलटे, बोले- वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा विस चुनाव

Sat, 19 Aug 2017 02:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी Updated Sat, 19 Aug 2017 02:15 PM IST
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sushil kumar shine statement over himachal assembly elections

हिमाचल कांग्रेस प्रभारी सुशील कुमार शिंदे एक बार फिर पलट गए हैं। उन्होंने कहा कि सूबे में सबसे अनुभवी चेहरा वीरभद्र सिंह ही हैं। उन्हीं के नेतृत्व में विस चुनाव लड़ा जाएगा। टिकट के आवंटन में संगठन और सरकार में पूरा संतुलन रखा जाएगा।

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पंद्रह सितंबर के बाद किसी समय आचार संहिता लगने पर पार्टी हाईकमान टिकटों की घोषणा कर सकता है। उन्होंने टिकटों में ज्यादा फेरबदल न करके अनुभवी एवं पुराने चेहरों पर ही दांव लगाने के संकेत दिए।
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हालांकि, इससे पहले बैजनाथ पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा कि सीएम पद के उम्मीदवार का निर्णय पार्टी हाईकमान ही करेगा। 
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मंडी के भ्यूली के विपाशा सदन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा कि जहां ये सम्मेलन हो रहा है, वह कांग्रेस का मंदिर है। यहां टीका टिप्पणी भी होती है, मनमुटाव भी।

अंदर की खबरें देने वालों के लिए संदेश है कि यह ज्यादा दिन नहीं चलता है। चाहे आप कांग्रेस के कार्यकर्ता हों, पदाधिकारी हों या नेता। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस मजबूत और एकजुट है। 

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शिंदे मेरे इमिडिएट बॉस, कर देंगे एसीआर खराब: सीएम

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस सम्मेलन में कहा कि मुझे जनता ने छठी बार मुख्यमंत्री बनाया है। जबरदस्ती या किसी का हाथ पकड़कर गद्दी पर नहीं बैठा। पांच साल बाद चुनाव में विकास कार्यों का इम्तिहान होता है।

इन पांच सालों में इतना विकास हुआ है जितना न कभी हुआ और न होगा। वीरभद्र सिंह ने कहा कि मैं कोई लंबा भाषण नहीं देता। मेरे बाद शिंदे साहब ने बोलना है जो मेरे इमिडियेट बॉस हैं।

यदि मैं ज्यादा समय लूंगा तो वे कहीं मेरी एसीआर न खराब कर दें। बस इतना कहना है कि अखबारों में मत जाइए। कांग्रेस पार्टी एक है। किसी का कोई झगड़ा नहीं है। पार्टी एक होकर चुनाव लड़ेगी और जीतेगी भी।

नहीं थमी रार, खेमों में बंटी कांग्रेस में वार-पलटवार

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विधानसभा चुनाव की कमान को लेकर वीरभद्र और सुक्खू खेमे में वर्चस्व की जंग चरम पर पहुंच गई है। दोनों खेमों की जुबानी जंग के बीच हाईकमान भी मौन दिख रहा है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र की अपने मंत्री जीएस बाली पर ली चुटकी का जवाब बाली ने राजा से रंक वाले बयान पर दिया। चौंकाने वाली बात ये है कि हिमाचल प्रभारी शिंदे के सामने यह सब घट रहा है। दोनों खेमों के बीच शिंदे का समझौता फार्मूला उनके लौटते ही फेल हो गया। 

हाईकमान का रवैया वीरभद्र कैंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कार्यकर्ता पसोपेश में हैं कि आखिर हाईकमान का हाथ किसके साथ है। हर विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी प्लेटफार्म पर बाजी मारने वाले वीरभद्र इस बार क्या दांव खेलते हैं। यह देखना इस बार भी रोचक रहेगा। 

वीरभद्र और सुक्खू खेमे में खींचतान पर हाईकमान भी हुआ मौन

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कांग्रेस में पर्दे के पीछे चल रही सरकार और संगठन के बीच खेमेबाजी अब केंद्रीय नेतृत्व के सामने लाइव चल पड़ी है। 16 अगस्त को रंजीत रंजन के साथ हिमाचल पहुंचे कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे भी हाईकमान की तरह चुप्पी साधे हुए हैं।

उनके सामने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मंत्री बाली पर तंज कसा तो बाली ने अपने विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां में शिंदे के सामने ही मंच से मुख्यमंत्री पर राजा से रंक बनने का बयान दे डाला।

प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू बाली के समर्थन में उतर आए तो एक पूर्व विधायक ने वीरभद्र को काली भेड़ बता दिया।

खुद शिंदे ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कह कर वीरभद्र कैंप को आलाकमान का संदेश पहुंचाया है। अंबिका का प्रभार शिंदे के पास आने के बाद ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे वीरभद्र कैंप राहत महसूस करे।

दो मुद्दों पर अड़ा है वीरभद्र कैंप

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वीरभद्र कैंप की दो बड़ी मांगें आलाकमान से हैं। एक प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पद से हटाकर निर्वाचित अध्यक्ष तैनात करना।

जिसे आलाकमान ने अध्यक्ष पद चुनाव टालकर ठंडे बस्ते में डाल दिया। दूसरी प्रमुख मांग वीरभद्र के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा करने को लेकर है। इस मांग पर भी वीरभद्र को अभी तक कोई आश्वासन नहीं मिल पाया है। 

उत्तराखंड से हाईकमान ने नहीं लिया सबक 
प्रदेश में कांग्रेस हाईकमान उसी चुनौती को झेल रही है, जिसका खामियाजा पार्टी को उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में झेलना पड़ा था। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के बीच मतभेद सामने आने के बाद हाईकमान ने हस्तक्षेप नहीं किया।

नतीजा 70 सीटों में से 58 पर हार मिली। हिमाचल में संगठन सरकार के मतभेदों की स्थिति उत्तराखंड की तरह ही है। हिमाचल में अंबिका की जगह प्रदेश प्रभारी शिंदे को बनाने के अलावा मतभेद सुलझाने को कोई बड़ा निर्णय हाईकमान का नहीं आया है। 

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