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Shimla News: गलत आदतों में डालने वाला आपका दोस्त नहीं हो सकता
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डीएसपी अमित ठाकुर ने केंद्रीय विद्यालय जाखू के बच्चों को दी नशे से दूर रहने की सलाह, नशे से बचने के लिए एक शौक जरूर रखें
बोले, पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है नशा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नशे से बचने के लिए विद्यार्थियों में एक ऐसा शौक होना जरूरी है जो समय के साथ आदत बन जाए और नशे से दूर रखे। यह जानकारी केंद्रीय विद्यालय जाखू में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में डीएसपी अमित ठाकुर ने विद्यार्थियों को दी।
उन्होंने कहा कि गलत आदतों में डालने वाला कभी आपका दोस्त नहीं हो सकता। नशा करने वाला खुद ही नहीं बल्कि इससे उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है। अमित ठाकुर ने विद्यार्थियों को उड़ता पंजाब फिल्म का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह से एक संपन्न राज्य की युवा पीढ़ी को नशे की लत ने खत्म कर दिया और अब हिमाचल भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि तनाव को खत्म करने का एकमात्र तरीका नशा नहीं है। चिट्टा समेत अन्य सिंथेटिक नशे का सेवन करने वाले व्यक्ति चार से पांच साल से ज्यादा नहीं जीता। अंत में ओवरडोज से उसकी जिंदगी का दर्दनाक अंत हो जाता है। जिले में ऐसा एक भी दिन नहीं जाता जब चिट्टे की ओवरडोज किसी की मौत न हो। एक बार यदि नशे की इस दलदल में फंस गए और पुलिस में केस दर्ज हुआ तो आप अपराधी की श्रेणी में आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि ज्यादातर नशे की गिरफ्त में 26 साल से कम उम्र के युवा आ रहे हैं। वहीं कुछ युवाओं की हालत नशे में इतनी खराब हो जाती है कि चलती फिरती लाश बनकर रह जाते हैं।
नशा एक आग कुआं है
एक बार जिस व्यक्ति को चिट्टे की लत लग जाती है फिर वह कभी वापस नहीं आ पाता। यह एक आग का कुआं है। अपने दोस्तों को इन चीजों में ना बोलना सीखें। वहीं आगे से आगे नशे से बचाव के लिए जागरूकता फैलाएं। अमर उजाला का पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम सराहनीय प्रयास है। छात्र अच्छे कार्य करें और उपलब्धियां प्राप्त कर अपनी पहचान बनाने का प्रयास करें। गलत संगत से दूर रहें। नशा कर जीवन को बर्बाद न करें।
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-वीर चंद, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय जाखू
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, अधिकारी ने दिए जवाब
पुलिस की पाठशाला के दौरान विद्यार्थियों ने कई रोचक सवाल भी पूछे। ग्यारहवीं की छात्रा शीना ने अधिकारी से पूछा कि चिट्टे के आदी को चिट्टा लेने से कैसे रोकें। अधिकारी ने कहा कि इस बीमारी से पीछा छुड़वाने की प्रक्रिया बहुत लंबी और दर्दभरी है। कोशिश यह करें कि उस तक चिट्टा पहुंचने ही न दें। केशव ने पूछा की नशे का सामान बाजार में खुलेआम क्यों बिकता है और विक्रेता छोटे बच्चों को क्यों देते हैं। इस पर अधिकारी ने कहा कि नशे की कुछ चीजों को पुराने जमाने में दवाई के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। यदि कोई विक्रेता छोटे बच्चे को नशों की चीजें बेचता हुआ पाया जाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाती है। भरत ने पूछा की सरकार ने ड्रग को रोकने के लिए क्या किया है। इस पर अधिकारी ने कहा के सरकार ने इसके लिए कई विशेष एक्ट बनाए हैं। पुलिस के माध्यम से जन चेतना अभियान चलाकर लोगों को नशे के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। नौवीं की अनन्या ने पूछा कि नशा करने से युवा खेलों में कैसे पिछड़ रहा है। अधिकारी ने कहा कि नशे से युवाओं का शरीर पुरी तरह खत्म हो रहा है जिससे वह खेलों में पिछड़ रहे हैं।
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बोले, पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है नशा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नशे से बचने के लिए विद्यार्थियों में एक ऐसा शौक होना जरूरी है जो समय के साथ आदत बन जाए और नशे से दूर रखे। यह जानकारी केंद्रीय विद्यालय जाखू में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में डीएसपी अमित ठाकुर ने विद्यार्थियों को दी।
उन्होंने कहा कि गलत आदतों में डालने वाला कभी आपका दोस्त नहीं हो सकता। नशा करने वाला खुद ही नहीं बल्कि इससे उसका परिवार भी बर्बाद हो जाता है। अमित ठाकुर ने विद्यार्थियों को उड़ता पंजाब फिल्म का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह से एक संपन्न राज्य की युवा पीढ़ी को नशे की लत ने खत्म कर दिया और अब हिमाचल भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि तनाव को खत्म करने का एकमात्र तरीका नशा नहीं है। चिट्टा समेत अन्य सिंथेटिक नशे का सेवन करने वाले व्यक्ति चार से पांच साल से ज्यादा नहीं जीता। अंत में ओवरडोज से उसकी जिंदगी का दर्दनाक अंत हो जाता है। जिले में ऐसा एक भी दिन नहीं जाता जब चिट्टे की ओवरडोज किसी की मौत न हो। एक बार यदि नशे की इस दलदल में फंस गए और पुलिस में केस दर्ज हुआ तो आप अपराधी की श्रेणी में आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि ज्यादातर नशे की गिरफ्त में 26 साल से कम उम्र के युवा आ रहे हैं। वहीं कुछ युवाओं की हालत नशे में इतनी खराब हो जाती है कि चलती फिरती लाश बनकर रह जाते हैं।
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नशा एक आग कुआं है
एक बार जिस व्यक्ति को चिट्टे की लत लग जाती है फिर वह कभी वापस नहीं आ पाता। यह एक आग का कुआं है। अपने दोस्तों को इन चीजों में ना बोलना सीखें। वहीं आगे से आगे नशे से बचाव के लिए जागरूकता फैलाएं। अमर उजाला का पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम सराहनीय प्रयास है। छात्र अच्छे कार्य करें और उपलब्धियां प्राप्त कर अपनी पहचान बनाने का प्रयास करें। गलत संगत से दूर रहें। नशा कर जीवन को बर्बाद न करें।
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-वीर चंद, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय जाखू
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, अधिकारी ने दिए जवाब
पुलिस की पाठशाला के दौरान विद्यार्थियों ने कई रोचक सवाल भी पूछे। ग्यारहवीं की छात्रा शीना ने अधिकारी से पूछा कि चिट्टे के आदी को चिट्टा लेने से कैसे रोकें। अधिकारी ने कहा कि इस बीमारी से पीछा छुड़वाने की प्रक्रिया बहुत लंबी और दर्दभरी है। कोशिश यह करें कि उस तक चिट्टा पहुंचने ही न दें। केशव ने पूछा की नशे का सामान बाजार में खुलेआम क्यों बिकता है और विक्रेता छोटे बच्चों को क्यों देते हैं। इस पर अधिकारी ने कहा कि नशे की कुछ चीजों को पुराने जमाने में दवाई के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। यदि कोई विक्रेता छोटे बच्चे को नशों की चीजें बेचता हुआ पाया जाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाती है। भरत ने पूछा की सरकार ने ड्रग को रोकने के लिए क्या किया है। इस पर अधिकारी ने कहा के सरकार ने इसके लिए कई विशेष एक्ट बनाए हैं। पुलिस के माध्यम से जन चेतना अभियान चलाकर लोगों को नशे के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। नौवीं की अनन्या ने पूछा कि नशा करने से युवा खेलों में कैसे पिछड़ रहा है। अधिकारी ने कहा कि नशे से युवाओं का शरीर पुरी तरह खत्म हो रहा है जिससे वह खेलों में पिछड़ रहे हैं।