बर्फबारी से पैदा हुआ बड़ा संकट, सीएम भी चिंतित
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हिमाचल में हुई बर्फबारी के बाद कई इलाकों में पेयजल संकट पैदा हो गया है। शिमला में भी पानी की किल्लत हो गई है। पानी की पाइपें जमने से पानी की सप्लाई ठप हो गई है। वहीं, प्रदेश के अन्य इलाकों में बिजली व्यवस्था भी चरमरा गई है।
यही नहीं, यातायात व्यवस्था ठप होने से कई इलाके कट गए हैं। बिना बिजली पानी के लोग घरों में ठिठुरने को मजबूर है। हालांकि, बर्फबारी रुकने से राहत जरूर मिली है। लेकिन ताजा हालात को देखते सीएम ने अफसरों को अलर्ट रहने को कहा है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्य के विभिन्न भागों में हाल ही की बर्फबारी से प्रभावित संपर्क मार्गों व अन्य आवश्यक सेवाओं की बहाली को लेकर समीक्षा बैठक भी की है। उन्होंने सचिवालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति लाइनों, बिजली की तारों और अन्य आवश्यक सेवाओं को दो दिन के भीतर बहाल करने का आदेश दिया।
यातायात सुचारू करने को कहा
वीरभद्र सिंह ने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों का जायजा लिया जाए। भारी बर्फबारी एवं भू-स्खलन से बाधित सभी मार्गों को खोलने के लिए प्रभावी पग उठाने के निर्देश दिए। सभी संबंधित विभागों विशेषकर लोक निर्माण, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य तथा विद्युत बोर्ड से आवश्यकतानुसार वांछित धनराशि का प्राकलन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बहाली और मुरम्मत कार्यों में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। बैठक में मुख्य सचिव पी मित्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वीसी फारका, तरुण श्रीधर और नरेन्द्र चौहान, प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी, पुलिस महानिदेशक संजय कुमार, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता नरेश शर्मा, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अभियंता आरके शर्मा, विद्युत बोर्ड एमडी पीसी नेगी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
आपदा प्रबंधन पर धूमल ने प्रदेश सरकार को घेरा
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मौसम विभाग की कड़ी चेतावनी के बावजूद आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार और प्रशासन के ढुलमुल रवैये को निराशाजनक करार दिया है। इसके लिए उन्होंने सरकार की कड़ी आलोचना की है। सवाल किया कि लगातार भारी बर्फबारी की चेतावनी दी जा रही है। इसके बावजूद पर्यटक रोहतांग दर्रे को कैसे पार किया।
धूमल ने कहा कि हिमपात शुरू होने के समय मढ़ी में 800 पर्यटकों सहित 2000 लोगों के फंसे होने की खबर थी, जिन्हें स्थानीय लोगों के सहयोग से सुरक्षित लाया जा सका। प्रशासन की इस लापरवाही से सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। सौभाग्यवश कोई दुर्घटना नहीं हुई।
प्रशासन और सरकार का यह रवैया निंदनीय है। धूमल ने कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल हादसों के पश्चात उठाए गए कदमों से ही नहीं होता है बल्कि हादसे न हों, इसके लिए भी सरकार को उचित प्रबंध करना चाहिए।
सिटी की सभी सड़कें बहाल होने का दावा
उधर, राजधानी में हुए भारी हिमपात ने बसों की आवाजाही पर ब्रेक लगा दी थी। बस स्टैंड से मैहली वाया आईएसबीटी सड़क मार्ग को छोड़ बाकी सभी रूटों पर बसों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
सोमवार सुबह मौसम साफ होते ही प्रशासन ने शनिवार को बाधित रहे मार्गों को खोलने का काम शुरू कर दिया। संजौली-लक्कड़ बाजार सड़क पर सुबह दस बजे से बसों की आवाजाही शुरू हो गई। देर शाम तक सर्कुलर रोड़ सहित सिटी शिमला के सभी सड़क मार्गों पर बसों की आवाजाही को सुचारु कर दिया गया है।
बर्फ हटाने को लेकर भेदभाव
शिमला में सड़क से बर्फ हटाने के मामले में भी एमसी भेदभाव कर रही है। वीवीआईपी रोड प्राथमिकता में हैं, दूसरे स्थानों पर बाद में देख लेंगे... जैसे हाल हैं। आम जनता की बर्फ पर फिसलने से पसलियां टूटे या हाथ पांव इन्हेंइससे कोई मतलब नहीं।
नगर निगम के इस दोहरे चेहरे से जाखू की जनता और सैलानियों को सोमवार को खूब परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोग बर्फ में गिरते- पड़ते अपने गंतव्य तक पहुंचे। जाखू मंदिर जाने वाली सड़क बर्फ से सफेद पड़ी थी।
अमर उजाला टीम जब जाखू मंदिर वाली सड़क पर नगर निगम के दावे की सत्यता परखने गई तो हैरान रह गई। नगर निगम ने केवल मुख्यमंत्री के निजी आवाज तक जाने वाली सड़क से बर्फ हटा दी थी।
यहां तक न केवल पैदल चलने वाले बल्कि गाड़ियां की आवाजाही भी शुरू हो गई थी लेकिन जैसे ही हॉली लाज से ऊपर जाखू मंदिर जाने वाली सड़क का रूख सोमवार सुबह साढ़े दस बजे किया तो नगर निगम का सच सामने आने लगा। सड़क और सीढ़ियां दोनों पर बर्फ जमी थी। इन पर लोग संभल- संभल कर चल रहे थे लेकिन कब तक बचते, लुढ़कते पड़ते और एक दूसरे को सहारा देते किसी तरह आ जा रहे थे।