शिमला बस हादसा: झंझीड़ी से आईजीएमसी तक चीख-पुकार, दहले दिल
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बस हादसे के बाद लोअर खलीनी से लेकर आईजीएमसी अस्पताल तक कोहराम मचा रहा। जिसने भी हादसे की खबर सुनी वह बदवाहस घटनास्थल की तरफ भागा। खून से लथपथ घायल बच्चों को देख हर किसी का मन द्रवित हो रहा था।
आईजीएमसी प्रबंधन को लोअर खलीनी में स्कूल बस हादसे की सूचना पहले ही दी जा चुकी थी। लोगों की अस्पताल परिसर में भारी भीड़ उमड़ रही थी उन पर काबू पाना वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों के लिए मुश्किल था।
घायल बच्चों की हालत देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे थे। रिश्तेदार एक दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए। दो निजी गाड़ियों और एक एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचे चालक परिचालक समेत नौ छात्राओं को उपचार दिया गया।
मां चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है उठो मेरी बेटी .. उठो।
एक मां चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है उठो मेरी बेटी .. उठो। बच्ची की मौत चुकी है। लेकिन मां को अभी भी उम्मीद थी बेटी जिंदा है तथा उसके पुकारने पर उठ खड़ी होगी।
बदहवाश हो चुकी मां आसपास से गुजर रहे लोगों को पकड़-पकड़कर कहती रही मेरी बेटी को उठाओ। मां के शब्द, डॉक्टर साहब मेरी बेटी को पीजीआई शिफ्ट करो वहां अच्छा इलाज मिलेगा। लेकिन डॉक्टरों की भी हिम्मत न हुई कि वह सीधे कह दें कि मेहल अब दुनिया छोड़ चुकी है।
मां के इन शब्दों को सुनकर कई डॉक्टर भी रुआंसे हो गए। मां की इन दर्दनाक चीखों से वार्ड में दाखिल हर मरीज की आंखों में आंसू थे। मेहल चेल्सी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती थी तथा वह भी उसी अभागी बस में सवार थी जो लोअर खलीनी में दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।
आठ बजे पहुंची पहली एंबुलेंस
तीन मिनट बाद दूसरी गाड़ी पहुंचती है, इसमें तीन छात्राएं थी, दो मिनट बाद एंबुलेंस भी पहुंचती हैं, इसमें दो छात्राएं थी और उपचार के लिए वार्ड में ले गए। डाक्टरों की टीम पहले से ही मुस्तैद है और घायलों को उपचार दिया जा रहा है।