हिमाचल में रामदेव को दोहरा झटका, अब क्या करेंगे बाबा?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाबा रामदेव को कांगड़ा में योग शिविर लगाने के लिए हिमाचल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट ने याचिका दायर कर चुनाव आयोग के उस आदेश पर स्टे मांगा था, जिसके तहत योगगुरु को 28 और 29 अप्रैल को कांगड़ा में शिविर की अनुमति को वापस ले लिया गया था।
न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का फैसला हालांकि प्रार्थी को सुनवाई का मौका दिए बिना पारित किया गया है। फिर भी परिस्थितियों को देखते हुए यह आदेश है।
अदालत ने कहा कि यह फैसला बाबा रामदेव के खिलाफ हाल ही में दर्ज प्राथमिकी के मद्देनजर लिया गया है। इसलिए कोर्ट चुनाव आयोग के निर्देशों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
योग शिविर हटाकर मैदान में लगाया ताला
एसडीएम अजीत भारद्वाज ने शिविर की मंजूरी रद्द करने की पुष्टि की है। प्रशासन की ओर से पतजंली योग समिति के जिला इंचार्ज को 16 अप्रैल को योग शिविर लगाने की अनुमति दी गई थी।
चुनाव आयोग ने 18 अप्रैल को आदेश जारी किए थे कि योग शिविरों या अन्य गैर राजनैतिक मंचों से यदि कोई राजनैतिक प्रचार करता है तो ऐसे कार्यक्रमों की मंजूरी को रद्द किया जाए।
इसे आधार बनाकर इस अनुमति को रद्द किया गया। इस फैसले के बाद एसडीएम ने ग्राउंड को खाली कराने के आदेश दिए। इसके बाद गेट पर ताला लगा दिया।
बाबा के खिलाफ केस दर्ज करने की दरख्वास्त
वहीं, दलितों को लेकर टिप्पणी करने पर योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। संत रविदास धर्मसभा के अध्यक्ष कर्म चंद भाटिया ने थाना सदर में बाबा राम देव के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमा कायम करने को लेकर दरख्वास्त दी।
कर्म चंद की ओर से दी गई दरख्वास्त में कहा गया है कि रामदेव का कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यह कहना कि उनका दलित गांव का दौरा हनीमून और पिकनिक शैली में होते हैं, इससे दलित वर्ग को ठेस पहुंची है।
प्रदेश में दलित समाज की भावनाओं को पहुंची गहरी ठेस और आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर बाबा राम देव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उधर, सदर पुलिस ने रपट दर्ज करने के बाद शिकायतकर्ता से कहा है कि जो टिप्पणी की गई है, वह शिमला में नहीं की गई है। इस बारे में संबंधित थाने में ही मुकदमा दर्ज करवाएं।