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आईजीएमसी में बढ़ने लगे स्क्रब टायफस के मरीज
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तीन माह में आ चुके हैं सौ से अधिक मामले, गर्भवती और बच्चों को एहतियात बरतने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कोरोना महामारी के बीच इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। अस्पताल के कई वार्ड बुखार से पीड़ित मरीजों से भर चुके हैं।
आलम यह है कि कई वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो मरीज दाखिल किए गए हैं। तीन माह में स्क्रब टायफस के 100 मामले आ चुके हैं। आईजीएमसी की मेडिसिन ओपीडी में इन दिनों काफी भीड़ देखने को मिल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मरीज बुखार की समस्या लेकर अस्पताल आ रहे हैं। इसमें ऐसे मरीज अधिक हैं जो हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे हैं।
आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान ने बताया कि अधिकांश लोग बुखार जैसी समस्या होने पर केमिस्टों की दुकानों पर स्वयं दवाइयां ले लेते हैं। इसके बाद में उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। बताया कि बुखार अधिक हो तो मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत उपचार करवाना चाहिए। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस मौसम में काफी ध्यान रखना चाहिए। कई बार तो इस बीमारी से मरीजों की जान तक चली जाती है।
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यह हैं लक्षण
स्क्रब टायफस होने पर मरीज को 104 से 105 डिग्री तक बुखार आता है। जोड़ो में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आता है। शरीर टूटा हुआ लगता है। इसके अलावा गर्दन और बाजू के नीचे के अलावा कूल्हों के ऊपर गिल्टियां निकल आती हैं।
ऐसे दिया जाता
आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान ने कहा कि जो लोग खेतों में काम करने जाते हैं वह गम बूट पहनकर जा सकते हैं। इसमें मरीजों को एजीथ्रोमाइसिन और बच्चों को डॉक्सीसाइक्लिन दवाई दी जाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कोरोना महामारी के बीच इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। अस्पताल के कई वार्ड बुखार से पीड़ित मरीजों से भर चुके हैं।
आलम यह है कि कई वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो मरीज दाखिल किए गए हैं। तीन माह में स्क्रब टायफस के 100 मामले आ चुके हैं। आईजीएमसी की मेडिसिन ओपीडी में इन दिनों काफी भीड़ देखने को मिल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मरीज बुखार की समस्या लेकर अस्पताल आ रहे हैं। इसमें ऐसे मरीज अधिक हैं जो हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे हैं।
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आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान ने बताया कि अधिकांश लोग बुखार जैसी समस्या होने पर केमिस्टों की दुकानों पर स्वयं दवाइयां ले लेते हैं। इसके बाद में उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। बताया कि बुखार अधिक हो तो मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत उपचार करवाना चाहिए। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस मौसम में काफी ध्यान रखना चाहिए। कई बार तो इस बीमारी से मरीजों की जान तक चली जाती है।
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यह हैं लक्षण
स्क्रब टायफस होने पर मरीज को 104 से 105 डिग्री तक बुखार आता है। जोड़ो में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आता है। शरीर टूटा हुआ लगता है। इसके अलावा गर्दन और बाजू के नीचे के अलावा कूल्हों के ऊपर गिल्टियां निकल आती हैं।
ऐसे दिया जाता
आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रेम मच्छान ने कहा कि जो लोग खेतों में काम करने जाते हैं वह गम बूट पहनकर जा सकते हैं। इसमें मरीजों को एजीथ्रोमाइसिन और बच्चों को डॉक्सीसाइक्लिन दवाई दी जाती है।