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Shimla News: राजधानी में फोरलेन पर दस जगह भूस्खलन का खतरा, रिपोर्ट तलब
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से में भूस्खलन के खतरे पर जिला प्रशासन अलर्ट, पिछली साल हुआ भारी नुकसान
कंपनी को बताना होगा, भूस्खलन रोकने के लिए क्या किया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से में बरसात में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। प्रशासन ने एनएचएआई और फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी से दो दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को प्रशासन के समक्ष पेश की जानी है।
एनएचएआई और ठेकेदार कंपनी को बताना होगा कि उन्होंने फोरलेन किनारे चिह्नित किए संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। इसका विस्तृत ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन की ओर से किए सर्वेक्षण में ढली से लेकर कैथलीघाट तक दस स्थान ऐसे चिह्नित किए हैं जहां भूस्खलन का खतरा है। इनमें ज्यादातर रिहायशी इलाकों से सटे क्षेत्र हैं जहां बरसात में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। बीते साल भी फोरलेन निर्माण से इसके किनारे बसे कई गांवों को भूस्खलन से खतरा पैदा हो चुका है। बीते साल जून में भट्ठाकुफर में पांच मंजिला मकान जमींदोज हो गया था। लिंडीधार, माठू कॉलोनी में भी कई मकानों पर खतरा मंडराया था। इसके बाद प्रशासन ने इन स्थानों को चिह्नित कर एनएचएआई और ठेकेदार कंपनी को राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए थे। एनएचएआई ने कई जगह इसका काम भी किया है। इस पर अब प्रशासन ने रिपोर्ट मांगी है। एडीएम प्रोटोकॉल ज्योति राणा ने कहा कि शुक्रवार तक एनएचएआई से रिपोर्ट मांगी है।
यह हैं संवेदनशील इलाके किए हैं चिह्नित
साइट नंबर एक ढली में दावत रेस्तरां के पास अवैज्ञानिक खोदाई के कारण यहां सुरक्षा दीवारें लगाने, ड्रेनेज सुधारने के काम होने हैं। इस क्षेत्र में साइट नंबर दो और तीन पर निजी भूमि से सटा इलाका भी संवेदनशील है। साइट नंबर चार चलौंठी में दो रिहायशी मकानों को खतरा है। यहां कई जगह दरारें पड़ चुकी हैं। यहां पानी की निकासी सुधारने, भूमि अधिग्रहण करने जैसे काम प्रस्तावित हैं। साइट नंबर पांच लंबीधार में फ्लाईओवर पिल्लर से दो मकानों को खतरा हो सकता है। यहां ढलान को मजबूती और पानी की निकासी सुधारी जानी है। साइट नंबर छह भट्ठाकुफर की माठू काॅलोनी में एक मकान पहले ही जमींदोज हो चुका है। बाकी इलाके को भी खतरा है। यहां ढलान को मजबूती देना जरूरी है। साइट नंबर सात शोघी में दो मकान संवेदनशील हैं। वहीं एक मकान के आसपास दरारें पड़ रही हैं। यहां ड्रेनेज हॉल्स और जमीन को मजबूती देने के काम प्रस्तावित हैं। साइट नंबर नौ शकराल में फोरलेन से सटी ढलान पर दो मकान बने हैं। इस मुहाल में साइट नंबर दस पर भूस्खलन का खतरा है। यहां भी बचाव कार्य प्रस्तावित है।
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रिहायशी इलाकों पर प्रशासन का फोक्स
जिला प्रशासन फोरलेन से सटे उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है जहां रिहायशी मकान हैं और आबादी भी ज्यादा है। इस बार बरसात में भूस्खलन की घटनाएं कम हो, इसके लिए फोरलेन किनारे निर्माण पर पूरी नजर रखी जा रही है। एनएचएआई ने ढली से कैथलीघाट तक कई जगह पहाड़ियों को मजबूती देने का काम पूरा कर लिया है। इसका नतीजा यह है कि अब बारिश में पहाड़ियों से पत्थर गिरना कम हो गए हैं। इन सभी कामों की रिपोर्ट एनएचएआई प्रशासन को देगा।
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कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से में भूस्खलन के खतरे पर जिला प्रशासन अलर्ट, पिछली साल हुआ भारी नुकसान
कंपनी को बताना होगा, भूस्खलन रोकने के लिए क्या किया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कालका-शिमला फोरलेन के ढली-कैथलीघाट हिस्से में बरसात में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। प्रशासन ने एनएचएआई और फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी से दो दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को प्रशासन के समक्ष पेश की जानी है।
एनएचएआई और ठेकेदार कंपनी को बताना होगा कि उन्होंने फोरलेन किनारे चिह्नित किए संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। इसका विस्तृत ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन की ओर से किए सर्वेक्षण में ढली से लेकर कैथलीघाट तक दस स्थान ऐसे चिह्नित किए हैं जहां भूस्खलन का खतरा है। इनमें ज्यादातर रिहायशी इलाकों से सटे क्षेत्र हैं जहां बरसात में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। बीते साल भी फोरलेन निर्माण से इसके किनारे बसे कई गांवों को भूस्खलन से खतरा पैदा हो चुका है। बीते साल जून में भट्ठाकुफर में पांच मंजिला मकान जमींदोज हो गया था। लिंडीधार, माठू कॉलोनी में भी कई मकानों पर खतरा मंडराया था। इसके बाद प्रशासन ने इन स्थानों को चिह्नित कर एनएचएआई और ठेकेदार कंपनी को राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए थे। एनएचएआई ने कई जगह इसका काम भी किया है। इस पर अब प्रशासन ने रिपोर्ट मांगी है। एडीएम प्रोटोकॉल ज्योति राणा ने कहा कि शुक्रवार तक एनएचएआई से रिपोर्ट मांगी है।
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यह हैं संवेदनशील इलाके किए हैं चिह्नित
साइट नंबर एक ढली में दावत रेस्तरां के पास अवैज्ञानिक खोदाई के कारण यहां सुरक्षा दीवारें लगाने, ड्रेनेज सुधारने के काम होने हैं। इस क्षेत्र में साइट नंबर दो और तीन पर निजी भूमि से सटा इलाका भी संवेदनशील है। साइट नंबर चार चलौंठी में दो रिहायशी मकानों को खतरा है। यहां कई जगह दरारें पड़ चुकी हैं। यहां पानी की निकासी सुधारने, भूमि अधिग्रहण करने जैसे काम प्रस्तावित हैं। साइट नंबर पांच लंबीधार में फ्लाईओवर पिल्लर से दो मकानों को खतरा हो सकता है। यहां ढलान को मजबूती और पानी की निकासी सुधारी जानी है। साइट नंबर छह भट्ठाकुफर की माठू काॅलोनी में एक मकान पहले ही जमींदोज हो चुका है। बाकी इलाके को भी खतरा है। यहां ढलान को मजबूती देना जरूरी है। साइट नंबर सात शोघी में दो मकान संवेदनशील हैं। वहीं एक मकान के आसपास दरारें पड़ रही हैं। यहां ड्रेनेज हॉल्स और जमीन को मजबूती देने के काम प्रस्तावित हैं। साइट नंबर नौ शकराल में फोरलेन से सटी ढलान पर दो मकान बने हैं। इस मुहाल में साइट नंबर दस पर भूस्खलन का खतरा है। यहां भी बचाव कार्य प्रस्तावित है।
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रिहायशी इलाकों पर प्रशासन का फोक्स
जिला प्रशासन फोरलेन से सटे उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है जहां रिहायशी मकान हैं और आबादी भी ज्यादा है। इस बार बरसात में भूस्खलन की घटनाएं कम हो, इसके लिए फोरलेन किनारे निर्माण पर पूरी नजर रखी जा रही है। एनएचएआई ने ढली से कैथलीघाट तक कई जगह पहाड़ियों को मजबूती देने का काम पूरा कर लिया है। इसका नतीजा यह है कि अब बारिश में पहाड़ियों से पत्थर गिरना कम हो गए हैं। इन सभी कामों की रिपोर्ट एनएचएआई प्रशासन को देगा।