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Shimla News: करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद कैसे ढह गया खेल स्टेडियम, रिपोर्ट तलब
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संजौली क्षेत्र में बन रहे स्टेडियम पर शहरी विधायक हरीश जनारथा ने तलब की रिपोर्ट, आज खुद मौके का लेंगे जायजा
विधायक बोले, पहले भी दिए थे ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली क्षेत्र में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत निर्माणाधीन खेल स्टेडियम के ढहने के मामले में रिपोर्ट तलब की गई है। शहरी विधायक हरीश जनारथा ने लोक निर्माण विभाग और खेल विभाग से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी है। विधायक सोमवार को स्टेडियम का जायजा लेने खुद मौके पर जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग और खेल विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया है।
विधायक का कहना है कि आखिर इतना पैसा खर्च करने के बावजूद स्टेडियम कैसे ढह गया, इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि इस क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के लिए उन्होंने भी पहले दिशा-निर्देश दिए थे। मैदान में बारिश का पानी जमा होने के बाद इसी में रिस जाता है। इस बारे में विभाग से पूछा था कि आखिर यह पानी कहां जा रहा है। यहां ड्रेनेज सुधारने की जरूरत है। सोमवार को मौके पर देखा जाएगा कि आखिर कैसे यह निर्माण ढह गया। इससे पहले स्थानीय कांग्रेस पार्षद अंकुश वर्मा भी इस स्टेडियम के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा चुके हैं। अब तक इस स्टेडियम पर करीब 2.50 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं। इससे पहले कि यह तैयार होता, शनिवार सुबह डंगे और रेलिंग समेत इसका बड़ा हिस्सा दरक गया। मौके पर अभी भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
बड़ा सवाल, कहां से आएगा अब पैसा
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत इस खेल स्टेडियम के लिए मिला बजट खत्म हो चुका है। इसके बावजूद यह स्टेडियम अधूरा है। अब इस मिशन के तहत स्टेडियम निर्माण के लिए बजट मिलना मुश्किल है। दूसरी ओर स्टेडियम की रेलिंग और डंगे ढहने से निर्माण की लागत और बढ़ जाएगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस काम के लिए कहां से पैसा आएगा। स्टेडियम का काम पूरा करने के लिए अब लाखों रुपये की जरूरत पड़ेगी। संजौली क्षेत्र के हजारों युवा लंबे समय से इस स्टेडियम के बनने का इंतजार कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में बनने वाला यह पहला स्टेडियम होगा, लेकिन अब इसके लिए लंबा इंतजार करना होगा।
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अहम इनसेट
जनता के पैसों की बर्बादी, पहले भी दरक चुके करोड़ों के प्रोजेक्ट
राजधानी शिमला में स्मार्ट सिटी मिशन का यह पहला प्रोजेक्ट नहीं है जिसका निर्माणकार्य सवालों के घेरे में आया हो। संजौली खेल स्टेडियम से पहले पहले भी करोड़ों रुपये से तैयार किए जा रहे कई बड़े प्रोजेक्टों पर सवाल उठ चुके हैं। शहर के बालूगंज चौक को चौड़ा करने के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई दीवार निर्माण के चंद माह बाद ही दरक गई थी। यहां पर दोबारा इस दीवार को सहारा देने के लिए नई दीवार लगानी पड़ी। इसी तरह गंज क्षेत्र में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नगर निगम ने ओपन जिम पार्क बनाया था। यह पार्क कच्ची नींव पर बनाया गया। उद्घाटन के चंद माह बाद ही नींव पर लगा डंगा दरक गया। नतीजा यह हुआ कि ओपन जिम पार्क भी ढह गया था। बैमलोई-कनलोग सड़क और सर्कुलर रोड पर वन मुख्यालय के पास भी सड़क चौड़ी की गई। यह काम स्मार्ट सिटी मिशन से किया गया। मौके पर करोड़ों रुपये से नई दीवारें लगाई गई लेकिन दोनों जगह भूस्खलन से ये दीवारें ढह गईं। इन सभी की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बावजूद स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने बाकी चल रहे कामों की गुणवत्ता नहीं जांची।
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विधायक बोले, पहले भी दिए थे ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली क्षेत्र में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत निर्माणाधीन खेल स्टेडियम के ढहने के मामले में रिपोर्ट तलब की गई है। शहरी विधायक हरीश जनारथा ने लोक निर्माण विभाग और खेल विभाग से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी है। विधायक सोमवार को स्टेडियम का जायजा लेने खुद मौके पर जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग और खेल विभाग के अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया गया है।
विधायक का कहना है कि आखिर इतना पैसा खर्च करने के बावजूद स्टेडियम कैसे ढह गया, इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि इस क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के लिए उन्होंने भी पहले दिशा-निर्देश दिए थे। मैदान में बारिश का पानी जमा होने के बाद इसी में रिस जाता है। इस बारे में विभाग से पूछा था कि आखिर यह पानी कहां जा रहा है। यहां ड्रेनेज सुधारने की जरूरत है। सोमवार को मौके पर देखा जाएगा कि आखिर कैसे यह निर्माण ढह गया। इससे पहले स्थानीय कांग्रेस पार्षद अंकुश वर्मा भी इस स्टेडियम के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा चुके हैं। अब तक इस स्टेडियम पर करीब 2.50 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं। इससे पहले कि यह तैयार होता, शनिवार सुबह डंगे और रेलिंग समेत इसका बड़ा हिस्सा दरक गया। मौके पर अभी भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
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बड़ा सवाल, कहां से आएगा अब पैसा
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत इस खेल स्टेडियम के लिए मिला बजट खत्म हो चुका है। इसके बावजूद यह स्टेडियम अधूरा है। अब इस मिशन के तहत स्टेडियम निर्माण के लिए बजट मिलना मुश्किल है। दूसरी ओर स्टेडियम की रेलिंग और डंगे ढहने से निर्माण की लागत और बढ़ जाएगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस काम के लिए कहां से पैसा आएगा। स्टेडियम का काम पूरा करने के लिए अब लाखों रुपये की जरूरत पड़ेगी। संजौली क्षेत्र के हजारों युवा लंबे समय से इस स्टेडियम के बनने का इंतजार कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में बनने वाला यह पहला स्टेडियम होगा, लेकिन अब इसके लिए लंबा इंतजार करना होगा।
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जनता के पैसों की बर्बादी, पहले भी दरक चुके करोड़ों के प्रोजेक्ट
राजधानी शिमला में स्मार्ट सिटी मिशन का यह पहला प्रोजेक्ट नहीं है जिसका निर्माणकार्य सवालों के घेरे में आया हो। संजौली खेल स्टेडियम से पहले पहले भी करोड़ों रुपये से तैयार किए जा रहे कई बड़े प्रोजेक्टों पर सवाल उठ चुके हैं। शहर के बालूगंज चौक को चौड़ा करने के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई दीवार निर्माण के चंद माह बाद ही दरक गई थी। यहां पर दोबारा इस दीवार को सहारा देने के लिए नई दीवार लगानी पड़ी। इसी तरह गंज क्षेत्र में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नगर निगम ने ओपन जिम पार्क बनाया था। यह पार्क कच्ची नींव पर बनाया गया। उद्घाटन के चंद माह बाद ही नींव पर लगा डंगा दरक गया। नतीजा यह हुआ कि ओपन जिम पार्क भी ढह गया था। बैमलोई-कनलोग सड़क और सर्कुलर रोड पर वन मुख्यालय के पास भी सड़क चौड़ी की गई। यह काम स्मार्ट सिटी मिशन से किया गया। मौके पर करोड़ों रुपये से नई दीवारें लगाई गई लेकिन दोनों जगह भूस्खलन से ये दीवारें ढह गईं। इन सभी की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बावजूद स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने बाकी चल रहे कामों की गुणवत्ता नहीं जांची।