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हिमाचल विधानसभा: सीएम सुक्खू बोले- विदेश जाने को तैयार डॉक्टर, चंबा आने से कतरा रहे; नई नीति बनाएगी सरकार

Mon, 31 Aug 2026 07:04 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 31 Aug 2026 07:04 PM IST
सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव करने जा रही है। चंबा जैसे कठिन क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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CM Sukhu says doctors are ready to go abroad but reluctant to come to Chamba; govt to formulate a new policy.
विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू । - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए प्रदेश सरकार अलग नीति बनाने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव करने जा रही है। चंबा जैसे कठिन क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। विधायक नीरज नैय्यर के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि नवनिर्मित 200 बिस्तर वाले अस्पताल सरोल के उद्घाटन के बाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा के सुचारु संचालन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 311 पद भरने का मामला सरकार के विचाराधीन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सकों को पांच लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बावजूद दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर सेवाएं देने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर विदेश जाने के लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं देने से कतराते हैं।

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सरकार का प्रयास है कि मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने बताया कि दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों और फैकल्टी की कमी के समाधान को लेकर हाल ही में बैठक भी हुई है, जिसमें संबंधित विधायक और विधानसभा अध्यक्ष भी मौजूद थे। सरकार इस समस्या के स्थायी समाधान के विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में भी फैकल्टी पूरी करने में काफी समय लगा था। इसी अनुभव को देखते हुए चंबा जैसे नए एवं दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है।

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करुणामूलक आधार पर 1,620 आश्रितों को मिली सरकारी नौकरी
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 1,620 आश्रितों को करुणामूलक आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में सदन पटल पर यह जानकारी लिखित जवाब के रूप में दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य पात्र आवेदकों को भी करुणामूलक आधार पर रोजगार देने की प्रक्रिया जारी है। सरकार की ओर से दिए गए लिखित जवाब के अनुसार करुणामूलक आधार पर रोजगार के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा को 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये प्रति परिवार किया गया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने 8 अक्तूबर 2025 और 1 जुलाई 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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नक्षत्र वाटिका और स्वरोजगार धाम पर उठे सवाल
 भाजपा विधायक राकेश जमवाल ने प्रश्नकाल के दौरान नौणी विश्वविद्यालय की नक्षत्र वाटिका और स्वरोजगार धाम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन कामों के लिए टेंडर नहीं किए गए। कोटेशन के माध्यम से काम किया गया। जवाब में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह कार्य राज्यपाल की परिकल्पना हैं। इस कार्य में कोई गड़बड़ी हुई तो विधायक तथ्य दें। इस पर विधायक ने कहा कि क्या राज्यपाल ने कहा है कि टेंडर मत करो। जब नौणी विवि में सिविल विंग हैं तो कोटेशन करवाने की मंशा क्या है। इस पर मंत्री नेगी ने कहा कि कोटेशन भी एक तरीका है। कम समय में काम करवाने के लिए ऐसा किया जाता है। 

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