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हिमाचल: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बिंदल बोले- गरीब की पर्ची के लिए ₹10 नहीं, लेकिन आलीशान दफ्तरों पर करोड़ों खर्च
Wed, 23 Sep 2026 12:14 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:14 PM IST
सार
Rajeev Bindal Government Attack: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि एक तरफ आम जनता पर टैक्स और महंगाई का बोझ बढ़ रहा है, वहीं मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए आलीशान कार्यालयों और सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सुविधाओं तथा आलीशान कार्यालयों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के पुराने अल्टो कार से जुड़े सार्वजनिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का सफर अब आलीशान गाड़ियों, करोड़ों रुपये के दफ्तरों और कोठियों तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, दूसरी तरफ प्रदेश की जनता कर्ज, टैक्स और महंगाई के बोझ का सामना कर रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को मिलने वाली राहतों में लगातार बदलाव और कटौती की जा रही है। उनके बयान के अनुसार, बिजली सब्सिडी में बदलाव के साथ बिजली पर विभिन्न सेस लगाए गए हैं। उन्होंने स्टाम्प ड्यूटी और एचआरटीसी से जुड़ी रियायतों में बदलाव का भी उल्लेख किया।
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₹10 की पर्ची का मुद्दा उठाया
डॉ. बिंदल ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों से पर्ची के लिए ₹10 लिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गरीब और बीमार व्यक्ति के लिए राहत की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर सरकार अपनी सुख-सुविधाओं पर खर्च कर रही है। उन्होंने हिमकेयर के तहत उपचार को लेकर लोगों और अस्पतालों के सामने आने वाली समस्याओं का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार को इन मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देना चाहिए।
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पेंशनर्स और बेरोजगार युवाओं का भी मुद्दा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के पेंशनर्स अपनी देनदारियों और समय पर पेंशन की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने बेरोजगार युवाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार यह वादा अब युवाओं के लिए सवाल बन गया है। उन्होंने महिलाओं और आम परिवारों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। बिंदल ने कहा कि परिवार बिजली, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बढ़ते खर्च को लेकर परेशान हैं।
स्कूलों और नेशनल हाईवे कार्यालयों पर सवाल
डॉ. बिंदल ने सरकारी स्कूलों को बंद और मर्ज करने के फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ आलीशान कार्यालयों का उद्घाटन किया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ जनता की सेवा और विकास कार्यों के लिए बनाए गए सरकारी कार्यालयों को बंद या पुनर्गठित किया जा रहा है।
बिंदल के अनुसार, हाल ही में नेशनल हाईवे से संबंधित एक डिवीजन और आठ सब-डिवीजन बंद करने की अधिसूचना जारी की गई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन कार्यालयों को बंद करने से संबंधित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मरम्मत और विकास कार्यों पर क्या असर पड़ेगा।
सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों पर पहला अधिकार प्रदेश की जनता, गरीब, किसान, कर्मचारी, पेंशनर, महिला और बेरोजगार युवा का होना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में सवाल उठाया कि यदि गरीबों की राहत, हिमकेयर और विकास कार्यालयों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, तो सत्ता की सुख-सुविधाओं और आलीशान कार्यालयों के लिए करोड़ों रुपये कैसे उपलब्ध हैं।
बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री के अल्टो कार से शुरू हुए सफर और आज की सरकारी सुख-सुविधाओं के बीच का अंतर प्रदेश की जनता देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों और खर्च का राजनीतिक हिसाब जनता स्वयं करेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में अपना फैसला देगी।
डॉ. बिंदल ने सरकारी स्कूलों को बंद और मर्ज करने के फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ आलीशान कार्यालयों का उद्घाटन किया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ जनता की सेवा और विकास कार्यों के लिए बनाए गए सरकारी कार्यालयों को बंद या पुनर्गठित किया जा रहा है।
बिंदल के अनुसार, हाल ही में नेशनल हाईवे से संबंधित एक डिवीजन और आठ सब-डिवीजन बंद करने की अधिसूचना जारी की गई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन कार्यालयों को बंद करने से संबंधित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मरम्मत और विकास कार्यों पर क्या असर पड़ेगा।
सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों पर पहला अधिकार प्रदेश की जनता, गरीब, किसान, कर्मचारी, पेंशनर, महिला और बेरोजगार युवा का होना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में सवाल उठाया कि यदि गरीबों की राहत, हिमकेयर और विकास कार्यालयों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है, तो सत्ता की सुख-सुविधाओं और आलीशान कार्यालयों के लिए करोड़ों रुपये कैसे उपलब्ध हैं।
बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री के अल्टो कार से शुरू हुए सफर और आज की सरकारी सुख-सुविधाओं के बीच का अंतर प्रदेश की जनता देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों और खर्च का राजनीतिक हिसाब जनता स्वयं करेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में अपना फैसला देगी।