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हिमाचल: नियम नहीं मानें तो बड़े कचरा उत्पादकों का कटेगा बिजली-पानी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिखाई सख्ती

Wed, 23 Sep 2026 10:10 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 23 Sep 2026 10:10 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एक अप्रैल से लागू हो चुके हैं। नियम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ वाणिज्यिक, संस्थागत और सरकारी प्रतिष्ठानों पर भी लागू होंगे।

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Himachal: Electricity and water supply of bulk waste generators to be cut if rules are not followed
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बड़े स्तर पर ठोस कचरा पैदा करने वाले प्रतिष्ठानों यानी बल्क वेस्ट जनरेटरों ने नियमों का पालन नहीं किया तो उनकी बिजली और पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से काटे जाएंगे। पहले स्थानीय निकाय की ओर से लिखित नोटिस दिया जाएगा। फिर जिला उपायुक्त की विशेष सेल कार्रवाई कर सकेगी। जिला उपायुक्तों को स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर छह सप्ताह के भीतर बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद संबंधित स्थानीय निकाय इन सभी संस्थानों को लिखित नोटिस जारी करेंगे।

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हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एक अप्रैल से लागू हो चुके हैं। नियम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ वाणिज्यिक, संस्थागत और सरकारी प्रतिष्ठानों पर भी लागू होंगे। नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है। इनमें गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल है।
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गीले कचरे में रसोई, खाद्य और अन्य जैव-अवक्रमणीय कचरा, जबकि सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी पुनर्चक्रण योग्य सामग्री शामिल होगी। सेनेटरी कचरे में इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी टॉवल पैड आदि तथा विशेष देखभाल वाले कचरे में सीएफएल बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब, एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे, इस्तेमाल की गई सीरिंज, टूटे पारे वाले थर्मामीटर और बैटरियां शामिल हैं। सेनेटरी कचरे को निर्माताओं या ब्रांड की ओर से उपलब्ध कराए गए पाउच अथवा रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटकर निर्धारित स्थान पर सौंपना होगा। कचरा जलाना, जमीन में दबाना, खुले में फेंकना अथवा नालियों, जलस्रोतों और सार्वजनिक स्थानों पर डालना प्रतिबंधित है।

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छात्रों को बनाया जाएगा हाउसहोल्ड सुपरवाइजर
सदस्य सचिव ने कहा कि घरों में कचरा पृथक्करण की आदत विकसित करने में विद्यार्थियों की अहम भूमिका होगी। स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से पाठ्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सैद्धांतिक और व्यावहारिक मॉड्यूल शामिल किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वे अपने परिवारों को घर में शत-प्रतिशत कचरा अलग करने के लिए प्रेरित कर सकें। राज्यस्तरीय समिति और जिलास्तरीय क्रियान्वयन समितियों का गठन किया है। स्कूलों में और उच्च शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सैद्धांतिक और व्यावहारिक मॉड्यूल शामिल कर रहे हैं।

ग्रीन विलेज और मॉडल विलेज की तर्ज पर विकसित करने की योजना
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदेश के अन्य विभागों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर की स्वच्छता रैंकिंग में हिमाचल के दो-तीन शहरों को टॉप-10 में लाने की तैयारी कर रहा है। इन शहरों के नाम जल्द घोषित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश के कुछ गांवों को ‘ग्रीन विलेज’ और ‘मॉडल विलेज’ की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। बोर्ड सिंगल यूज प्लास्टिक और माइक्रो प्लास्टिक पर रोक को और प्रभावी बनाने के लिए बाय-बैक नीति तैयार करने पर भी विचार-विमर्श कर रहा है। इसके साथ ही डिपॉजिटरी फंड योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे के संग्रह, पुनर्चक्रण और उचित प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

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