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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Proposal to increase electricity rates by 90 paise per unit in Himachal, revenue loss reaches 275 crores

Electricity Rates HP: बिजली का बिल देगा झटका, बोर्ड का इतने पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव

Sat, 03 Dec 2022 10:39 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 Dec 2022 10:39 AM IST
सार

लाखों उपभोक्ताओं केे बिजली का बिल झटका दे सकता है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 125 यूनिट तक निशुल्क बिजली देने से बोर्ड का आर्थिक संतुलन गड़बड़ा गया है। इससे बोर्ड का राजस्व घाटा 275 करोड़ पहुंच गया है।

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Proposal to increase electricity rates by 90 paise per unit in Himachal, revenue loss reaches 275 crores
बिजली - फोटो : amar ujala

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं केे बिजली का बिल झटका दे सकता है। बिजली बोर्ड ने अप्रैल 2023 से बिजली दरें 90 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी करने का प्रस्ताव तैयार किया है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 125 यूनिट तक निशुल्क बिजली देने से बोर्ड का आर्थिक संतुलन गड़बड़ा गया है। इससे बोर्ड का राजस्व घाटा 275 करोड़ पहुंच गया है। प्रदेश में बीते तीन साल से बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बोर्ड को सरकार की ओर से हालांकि अनुदान के तौर पर इस वर्ष 750 करोड़ रुपये दिए गए हैं, इसके बावजूद बोर्ड को अपना खर्च पूरा करना मुश्किल हो गया है। प्रतिमाह करीब 180 करोड़ रुपये वेतन और पेंशन के लिए बोर्ड को चाहिए होते हैं। ऐसे में राज्य विद्युत नियामक आयोग में बोर्ड ने याचिका दायर कर अप्रैल 2023 से बिजली दरों में बढ़ोतरी करने की वकालत की है। हिमाचल प्रदेश के करीब 25 लाख घरेलू और अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बिजली बोर्ड सप्लाई मुहैया करवा रहा है।

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करीब 14 लाख घरेलू उपभोक्ता प्रतिमाह 125 यूनिट से कम बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में इन उपभोक्ताओं के बिल शून्य हो गए हैं। ऐसे उपभोक्ताओं से बोर्ड मीटर रेंट और अन्य सेवा शुल्क भी नहीं ले रहा है। निशुल्क बिजली की एवज में सरकार की ओर से बोर्ड को प्रतिमाह 66 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। 31 दिसंबर 2022 तक के लिए सरकार ने इसका भुगतान कर दिया है। मार्च 2022 में विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2022-23 के लिए बिजली बोर्ड की राजस्व जरूरतों को 5,730 करोड़ रुपये आंका था। यह राजस्व जरूरतें निशुल्क बिजली देने के बाद और बढ़ गई हैं। ऐसे में बोर्ड प्रबंधन ने घाटे को पूरा करने के लिए आयोग से वर्ष 2023-24 के दौरान 126 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए दरें बढ़ाने की मांग की है। बोर्ड की इस याचिका पर जल्द ही आयोग की ओर से जन सुनवाई की जाएगी। सरकार से भी पक्ष मांगा जाएगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग मार्च 2023 में दरों को लेकर फैसला लेगा। एक अप्रैल 2023 से नई बिजली दरें प्रदेश में लागू होंगी।
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कांग्रेस सरकार आई तो फिर बनानी पड़ेगी याचिका
प्रति माह 300 यूनिट निशुल्क बिजली देने का घोषणापत्र में किया है एलान 
बोर्ड प्रबंधन ने आयोग में दायर याचिका को भाजपा सरकार की ओर से प्रतिमाह घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही 125 यूनिट तक निशुल्क बिजली से हो रहे राजस्व घाटे के आधार पर तैयार किया है। आठ दिसंबर को घोषित होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों में अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो बोर्ड को याचिका दोबारा से बनानी पड़ेगी। कांग्रेस ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट निशुल्क बिजली देने का अपने घोषणापत्र में एलान किया है।
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कर्मचारी यूनियन निशुल्क बिजली का कर रही विरोध
राज्य बिजली बोर्ड की कर्मचारी यूनियन खराब माली हालत का हवाला देते हुए सभी घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 125 यूनिट बिजली निशुल्क देने का विरोध कर रही है। समय से वेतन और पेंशन की अदायगी न होने से नाराज यूनियन ने इस योजना को सिर्फ जरूरतमंदों तक ही सीमित करने की मांग उठाई है। यूनियन के राज्य महासचिव हीरालाल वर्मा का कहना है कि इस योजना का दायरा घटाने के साथ प्रबंधन को अन्य फिजूलखर्च भी कम करने चाहिए।

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