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संस्कृत का संवर्धन जरूरी : प्रो. राजिंद्र
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एचपीयू में भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत का अवदान पर राष्ट्र स्तर की संगोष्ठी आयोजित
प्रति कुलपति प्रो. वर्मा ने कहा कि संस्कृत एक विशिष्ट ज्ञान संपन्न भाषा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने एक दिन की संगोष्ठी का आयोजन किया। ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत का अवदान’ विषय पर आयोजित राष्ट्र स्तर की संगोष्ठी में प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा मुख्यातिथि रहे।
विवि के चीफ वार्डन प्रो. रोशन लाल जिंटा विशिष्ट अतिथि और अधिष्ठाता भाषा संकाय प्रो. नीलिमा कंवर सारस्वत अतिथि के रूप में शामिल हुए । प्रो. ललित कुमार आचार्य संगोष्ठी में मुख्य वक्ता रहे। मुख्यातिथि प्रो. राजिंद्र वर्मा ने कहा कि संस्कृत विशिष्ट ज्ञान संपन्न भाषा है। इसका संवर्धन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे व्यावहारिक उपयोग में लाने को प्रोत्साहन मिलता है।
प्रो. रोशन लाल जिंटा ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रो. नीलिमा कंवर ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन किए जाते रहने चाहिए। मुख्य वक्ता आचार्य गौड़ ने संस्कृत की विस्तृत महत्ता बताई। संगोष्ठी में 60 शोधार्थियों और आचार्यों ने पत्र-वाचन किया। संगोष्ठी का मंच संचालन डॉ. सपना चंदेल ने किया। डॉ. दीप लता ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. भवानी सिंह विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग, डॉ. लता देवी डॉ. मुकेश शर्मा तथा डॉ. विपन कुमार के अतिरिक्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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प्रति कुलपति प्रो. वर्मा ने कहा कि संस्कृत एक विशिष्ट ज्ञान संपन्न भाषा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने एक दिन की संगोष्ठी का आयोजन किया। ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत का अवदान’ विषय पर आयोजित राष्ट्र स्तर की संगोष्ठी में प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा मुख्यातिथि रहे।
विवि के चीफ वार्डन प्रो. रोशन लाल जिंटा विशिष्ट अतिथि और अधिष्ठाता भाषा संकाय प्रो. नीलिमा कंवर सारस्वत अतिथि के रूप में शामिल हुए । प्रो. ललित कुमार आचार्य संगोष्ठी में मुख्य वक्ता रहे। मुख्यातिथि प्रो. राजिंद्र वर्मा ने कहा कि संस्कृत विशिष्ट ज्ञान संपन्न भाषा है। इसका संवर्धन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे व्यावहारिक उपयोग में लाने को प्रोत्साहन मिलता है।
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प्रो. रोशन लाल जिंटा ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रो. नीलिमा कंवर ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन किए जाते रहने चाहिए। मुख्य वक्ता आचार्य गौड़ ने संस्कृत की विस्तृत महत्ता बताई। संगोष्ठी में 60 शोधार्थियों और आचार्यों ने पत्र-वाचन किया। संगोष्ठी का मंच संचालन डॉ. सपना चंदेल ने किया। डॉ. दीप लता ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. भवानी सिंह विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग, डॉ. लता देवी डॉ. मुकेश शर्मा तथा डॉ. विपन कुमार के अतिरिक्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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