फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Prisoners in jails will be freed from addiction, doctors will be deployed permanently.

Shimla: जेलों में बंद कैदियों से छुड़वाया जाएगा नशा, स्थायी तौर पर होगी डॉक्टरों की तैनाती

Fri, 26 Sep 2025 11:34 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 26 Sep 2025 11:34 AM IST
सार

प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को नशे के चंगुल से मुक्त करने के लिए कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग ने बड़ा कदम उठाया है।

विज्ञापन
Prisoners in jails will be freed from addiction, doctors will be deployed permanently.
जेल - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को नशे के चंगुल से मुक्त करने के लिए कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की जेलों में वर्तमान में 42 फीसदी कैदी एनडीपीएस एक्ट के तहत सजा काट रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कारागार विभाग ने प्रदेश सरकार, उच्च न्यायालय और केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष कैदियों के पुनर्वास और नशा मुक्ति के लिए ठोस पहल करने का मामला उठाया है। जेलों में कैदियों के लिए डि-एडिक्शन प्रोग्राम को प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। सभी प्रमुख जेलों में स्थायी तौर पर डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी, ताकि कैदियों को नियमित नशा मुक्ति उपचार उपलब्ध हो सके।

विज्ञापन

मनोवैज्ञानिक परामर्श, काउंसलिंग और आवश्यक दवाइयों की सुविधा भी दी जाएगी। कैदियों को नशे से दूर करना न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए बल्कि समाज में उनकी पुनर्वास के लिए भी जरूरी है। इस पहल के बाद कैदियों को सुधारात्मक गतिविधियों और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने की भी योजना है, जिससे रिहाई के बाद वे समाज में सामान्य जीवन जी सकें। हिमाचल प्रदेश में कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग के तहत 14 जेलों का संचालन किया जा रहाहै। दो सेंट्रल जेल कंडा और नाहन, नौ जिला जेल कैथू, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, धर्मशाला, ऊना, सोलन और चंबा के अलावा तीन सब जेल नालागढ़, कल्पा और नूरपुर में इस समय करीब 2850 कैदी सजा काट रहे हैं। इनमें 1024 अपराधी, 1809 अंडरट्रायल और 18 हिरासत में हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे कैदी जो नशे के चंगुल में फंसे हैं सजा पूरी करने के बाद सकारात्मक बदलाव के साथ समाज में लौट सकें इस उद्देश्य से जेलों में कैदियों की डि-एडिकशन के लिए स्थायी तौर पर डॉक्टरों की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर उच्च न्यायालय को सूचित किया गया है और प्रदेश सरकार से सुविधा उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया है। केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष भी यह मामला उठाया गया है। - अभिषेक त्रिवेदी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed