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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Marks revised after reevaluation will be valid from the original date of the exam; 'Van Mitra' candidate to re

शिमला: पुनर्मूल्यांकन में सुधारे अंक परीक्षा की मूल तिथि से ही होंगे मान्य, हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

Fri, 04 Sep 2026 06:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 04 Sep 2026 06:15 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन या अंक सुधार परीक्षा के बाद बढ़ा हुआ स्कोर मूल परीक्षा उत्तीर्ण करने की तिथि से ही लागू माना जाएगा। 

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Marks revised after reevaluation will be valid from the original date of the exam; 'Van Mitra' candidate to re
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन या अंक सुधार परीक्षा के बाद बढ़ा हुआ स्कोर मूल परीक्षा उत्तीर्ण करने की तिथि से ही लागू माना जाएगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने सिंगल जज के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि ईशान डोगरा को किन्नौर संभाग के किल्बा या करछम में उपलब्ध दो रिक्त पदों में से एक पर चार सप्ताह के भीतर वन मित्र के रूप में नियुक्त किया जाए। चूंकि अपीलकर्ता रामपुर का निवासी है (जो किन्नौर से सटा हुआ है), इसलिए संबंधित बीट का स्थानीय निवासी होने की शर्त में छूट प्रदान की गई है। अपीलकर्ता को बैकडेटेड वरिष्ठता का लाभ नहीं मिलेगा, उसकी सेवा से जुड़े लाभ केवल नियुक्ति आदेश की तिथि से लागू होंगे। इसके अलावा सिंगल जज द्वारा लगाया गया 5,000 रुपये का जुर्माना भी रद्द कर दिया गया है।

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गौरतलब है कि अपीलकर्ता ईशान डोगरा ने रामपुर के मशनू बीट में वन मित्र पद के लिए आवेदन किया था।ईशान ने 81.1% (409/500) अंक प्राप्त किए थे, जबकि चयनित निजी अभ्यर्थी के 79% अंक थे। इस आधार पर ईशान मेरिट में शीर्ष पर था। आवेदन पत्र जमा करते समय ईशान ने 22 अप्रैल 2019 का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें उसके 390 अंक (78%) थे। हालांकि, रीकाउंसिलिंग के दौरान उसने बोर्ड की ओर से जारी सुधार के बाद का 27 जून 2019 का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उसके अंक बढ़कर 409 हो गए थे।
 

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सिंगल जज ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि अभ्यर्थी ने उच्च अंक वाले प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदन नहीं किया था और तथ्य छिपाए थे। खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रक्रियात्मक नियमों में ढील दी जा सकती है। यदि किसी अभ्यर्थी के अंक पुनर्मूल्यांकन या सुधार परीक्षा के बाद बढ़ते हैं, तो वह सुधार उसी तिथि से प्रभावी माना जाएगा, जिस दिन उसने मूल योग्यता हासिल की थी। अदालत ने पाया कि दोनों प्रमाणपत्र हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ही जारी किए गए थे और दूसरे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर कोई संदेह नहीं था। चयन अधिकारियों को काउंसिलिंग के समय उपलब्ध संशोधित प्रमाणपत्र पर विचार करना चाहिए था।अदालत ने देखा कि चयनित निजी प्रतिवादी अभ्यर्थी की भी कोई गलती नहीं थी, क्योंकि पहले प्रमाणपत्र के आधार पर वह मेरिट में ऊपर था। इसलिए कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने किन्नौर डिवीजन के रामपुर फॉरेस्ट सर्कल (किल्बा और करछम) में उपलब्ध दो रिक्त पदों की जानकारी दी।

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