विधानसभा में खुलासा: पंचायत भवन, रेस्ट हाउस में संवर रहा भविष्य, 177 स्कूलों का अपना भवन नहीं
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर विधानसभा में सामने आई है। प्रदेश में 177 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपने भवन नहीं हैं। इनमें कई स्कूल रेस्ट हाउस, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, महिला मंडल भवन और दूसरे स्कूलों के कमरों में संचालित हो रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर विधानसभा में सामने आई है। प्रदेश में 177 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपने भवन नहीं हैं। इनमें कई स्कूल रेस्ट हाउस, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, महिला मंडल भवन और दूसरे स्कूलों के कमरों में संचालित हो रहे हैं। दिलचस्प यह है कि दूसरी तरफ पिछले तीन वर्षों में बंद किए गए 1,526 स्कूलों में से 1,473 स्कूल भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास मौजूद हैं। विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि भवनविहीन स्कूलों में से 12 के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित घोषित किए गए हैं। 28 स्कूलों के नए भवन निर्माणाधीन हैं, जबकि 14 के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। शेष मामलों में भूमि उपलब्ध न होना और अधिग्रहण संबंधी अड़चनें निर्माण में बाधा बनी हुई हैं।
बंद स्कूलों के 577 भवन उपयोग के लिए दिए
चंबा का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनरा का भवन आपदा के बाद असुरक्षित घोषित होने पर स्कूल को लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस में शिफ्ट करना पड़ा। आज 99 विद्यार्थी रेस्ट हाउस के महज चार कमरों में पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री के अनुसार स्कूल के नए भवन के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। तब तक विद्यार्थियों को अस्थायी व्यवस्था में ही पढ़ाई करनी होगी। बंद किए गए 1,526 स्कूलों में से 1,473 के भवन शिक्षा विभाग के स्वामित्व में हैं। इनमें से 577 भवन विभिन्न विभागों और संस्थाओं को उपयोग के लिए दिए गए हैं। इन भवनों में पंचायती राज विभाग, आंगनबाड़ी केंद्र, महिला मंडल, युवक मंडल, स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन, पर्यावरण एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग तथा मंदिर समितियां अपनी गतिविधियां संचालित कर रही हैं। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि बंद किए गए 53 स्कूलों के पास अपना कोई सरकारी भवन नहीं था। ये पहले से निजी या किराये के भवनों में संचालित हो रहे थे, इसलिए इनके बंद होने के बाद शिक्षा विभाग को कोई भवन नहीं मिला।
सीमावर्ती क्षेत्रों में पंजाबी को दूसरी भाषा बनाने से सरकार का इन्कार
पंजाब से सटे हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में पंजाबी भाषा के महत्व के बावजूद सरकारी स्कूलों में पंजाबी शिक्षकों की कमी गंभीर बनी हुई है। विधानसभा में सरकार ने खुलासा किया कि प्रदेश में पंजाबी भाषा के 100 स्वीकृत शिक्षकों के पदों में से 37 पद अभी भी रिक्त हैं। सबसे ऊना जिले में 22 पद खाली पड़े हैं। नालागढ़ के विधायक हरदीप सिंह बावा के सवाल के जवाब के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का दावा है कि जॉब ट्रेनी नीति के तहत 17 पदों पर भर्ती की कार्रवाई चल रही है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में केवल 63 पंजाबी शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 37 पद खाली हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार चंबा में तीन, कांगड़ा में दो, शिमला में एक, सिरमौर में तीन, सोलन में छह और ऊना में 22 पद रिक्त हैं। पंजाब से सटे क्षेत्रों में पंजाबी भाषा को द्वितीय भाषा या वैकल्पिक विषय के रूप में लागू करने की संभावना को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के स्कूलों में पहले से ही हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़ाई जा रही हैं। ऐसे में चौथी भाषा को शामिल करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।