जेबीटी भर्ती पर आए फैसले को चुनौती देने की तैयारी, कैबिनेट में होगी चर्चा
विभागीय सूत्रों ने बताया कि शिक्षा विभाग भी वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत ही जेबीटी भर्ती करने के पक्ष में है। प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को संशोधित करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों का मत है कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन भविष्य में होने वाली भर्तियों के लिए किया जा सकता है।
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जेबीटी भर्ती को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से आए फैसले को राज्य सरकार चुनौती दे सकती है। मंगलवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस मामले को लेकर चर्चा होने के आसार हैं। इसी तरह के एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से जेबीटी शिक्षकों को राहत दी गई है। ऐसे में प्रदेश सरकार का विधि विभाग राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा करने में जुट गया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि शिक्षा विभाग भी वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत ही जेबीटी भर्ती करने के पक्ष में है।
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को संशोधित करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों का मत है कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन भविष्य में होने वाली भर्तियों के लिए किया जा सकता है। पूर्व में जारी भर्ती प्रक्रिया पुराने नियमों के तहत ही होनी चाहिए। इस मामले को लेकर मंगलवार को मंत्रिमंडल से अवगत करवाया जाएगा। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते वर्ष 2019 से जेबीटी के करीब 2500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है।
सचिवालय का घेराव करेंगे जेबीटी, डीएलएड प्रशिक्षु
बीएड डिग्री धारकों को जेबीटी भर्ती में शामिल नहीं करने की मांग को लेकर मंगलवार को जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षण राज्य सचिवालय का घेराव करेंगे। प्रशिक्षकों ने हाईकोर्ट से आए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रशिक्षकों ने भी किया कक्षाओं का बहिष्कार
वहीं, प्रदेश के 12 सरकारी जेबीटी प्रशिक्षण संस्थानों सहित निजी संस्थानों में सोमवार को भी जेबीटी प्रशिक्षुओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। शुक्रवार को हाईकोर्ट की ओर से आए फैसले से नाराज प्रशिक्षकों ने शनिवार को भी कक्षाओं को बहिष्कार कयिा था। प्रशिक्षकों का कहना है कि जेबीटी भर्ती के लिए बीएड वालों को पात्र बनाने से उनका भविष्य संकट में पड़ जाएगा।
मंडी में राज्य विश्वविद्यालय बनाने के विधेयक पर होगी चर्चा
हिमाचल प्रदेश का दूसरा राज्य विश्वविद्यालय मंडी में स्थापित करने का विधेयक मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जाएगा। धर्मशाला में होने वाले विधानसभा के शीत सत्र में ड्राफ्ट पेश करने की सरकार से मंजूरी लेना जरूरी है। शिक्षा विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों ने विधेयक को अंतिम रूप दे दिया है। प्रदेश के पांच से छह जिलों के कॉलेजों की इस नए राज्य विश्वविद्यालय से संबद्धता होगी।
बीते दिनों हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह की अध्यक्षता में राज्य विश्वविद्यालय की रूपरेखा तैयार करने के लिए कमेटी का गठन करने को मंजूरी दी गई है। शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्ध सरकारी और निजी कॉलेजों की संख्या 400 से अधिक हो गई है। ऐसे में मुख्यमंत्री के गृह जिला मंडी में अब क्लस्टर विश्वविद्यालय को अपग्रेड कर राज्य विश्वविद्यालय बनाने का फैसला लिया गया है।