हिमाचल में फिर लौटा देसी गाय पालन का जमाना, लोग दे रहे अहमियत
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हिमाचल में फिर से देसी गाय को पालने का जमाना लौट रहा है। प्रदेश के लोग फिर से देसी गाय की अहमियत समझ रहे हैं। दूध के उत्पादों में हो रही मिलावट और प्राकृतिक खेती के लिए जिस तरह से देसी गाय के गोबर की मांग बढ़ी है। उसके बाद प्रदेश भर के लोग अब अपने घर में देसी गाय पालने या फिर देसी गाय की नस्ल को तैयार करने में सहयोग कर रहे हैं।
इसका खुलासा पशुपालन विभाग की ओर से प्रदेश भर में देसी गाय की बढ़ोतरी के लिए विभिन्न पशु चिकित्सालयों में उपलब्ध करवाए गए सीमन (वीर्य) से हुआ है। पशुपालन विभाग ने पिछले वर्ष प्रदेश भर में देसी नस्ल की शाहीवाल गाय के 71,528 सीमन पशु चिकित्सालयों में भेजे हैं।
इसके अलावा दूसरी देसी गाय की प्रजाति रेड सींधी की मांग भी प्रदेश भर में बढ़ी है। पिछले वर्ष प्रदेश भर में रेड सींधी गाय के 1,0,9315 सीमन चिकित्सालयों में पशु पालन विभाग ने पहुंचाए हैं।
इसके अलावा प्रदेश में सबसे अधिक देसी गाय पालने का रुझान चंबा जिला में बढ़ा है। जनजातीय जिले में शाहीवाल नस्ल के 30,847 तो रेड सींधी नस्ल के 20,816 सीमन पहुंचाए गए हैं। इसके अलावा भी इस जिले में इनकी मांग बहुत अधिक है।
इसके अलावा अन्य देसी नस्ल की गाय गिर की नस्ल को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश भर में 1091 सीमन बांटे गए, जबकि शाहीवाल क्रॉस के लिए 1,22,899 सीमन पशुपालन विभाग प्रदेश भर ने चल रहे पशु चिकित्सालयों में देसी गाय को बढ़ावा देने के लिए भेजे गए हैं। विभाग ने ये सीमन लोगों की मांग को देखते हुए भेजे हैं।
किस नस्ल के कितने सीमन कहां भेजे
जिला शाहीवाल रेडसींधी
चंबा 30847 20816
मंडी 12093 27400
ऊना 7439 10000
सोलन 4340 15234
शिमला 5089 11138
कांगड़ा 5849 3105
प्रदेश भर में लोगों का रुझान देसी गाय के लिए बढ़ा है। पशुपालन विभाग ने शाहीवाल नस्ल के 71,528, जबकि रेडसींधी नस्ल की गाय के 1,09,315 सीमन पशु चिकित्सालयों में भेजे हैं। - डॉ. अजमेर सिंह डोगरा, डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग, कांगड़ा