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Shimla News: पार्किंग के लिए है मारामारी, सड़कों पर वाहनों की कतारें, जाम से लोग परेशान

Wed, 21 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2026 11:59 PM IST
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Parking is a struggle, with long queues of vehicles lining the streets and traffic jams troubling people.
सोसायटी के हाल : न्यू शिमला सेक्टर-1
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राजधानी के वीआईपी वार्डों में शामिल पटयोग के सेक्टर-वन की सोसायटी के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लगातार बढ़ती आबादी के साथ सोसायटी की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। पार्किंग इस क्षेत्र की सबसे बड़ी परेशानी है। नगर निगम और हिमुडा की ओर से यहां कोई बड़ी पार्किंग नहीं है। शाम ढलते ही सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करने के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। सोसायटी की हर कॉलोनी की सड़क पर वाहनों की कतारें लग जाती हैं। पेश है सुमित ठाकुर की रिपोर्ट :-
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर के पटयोग वार्ड में सेल्फ फाइनेंस्ड स्कीम के तहत बसाए गए सेक्टर-वन में पार्किंग सबसे बड़ा मुद्दा है। इस सोसायटी में वाहनों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है, लेकिन सुविधा के नाम पर एक भी बड़ी पार्किंग नहीं है। शाम होते ही कॉलोनियों में सड़क किनारे गाड़ियां पार्क करने के लिए मारामारी शुरू हो जाती है।
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हिमुडा ने न्यू शिमला में ज्यादातर कॉलोनियां बसाई हैं। इसके बाद इन्हें नगर निगम को सौंप दिया लेकिन अब पार्किंग की सुविधा न तो नगर निगम दे रहा है और न ही हिमुडा। कॉलोनियों को जोड़ने के लिए बनाई गई संपर्क सड़कों पर अब वाहनों की कतारें लग रही हैं। सेक्टर-वन की लेन-एक, छतरी पार्क, श्रीराम अस्पताल से सटे इलाके और हाटेश्वरी मंदिर के आसपास की संकरी सड़कें गाड़ियों से भरी रहती हैं। कई जगह स्थिति यह है कि बड़े आपातकालीन वाहन तक इन सड़कों से नहीं गुजर पा रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन आवंटियों ने फ्लैट खरीदे हैं, उन्हें भी पार्किंग की सुविधा नहीं मिल रही। अवैध पार्किंग के कारण आए दिन जाम लगता है, जिससे विवाद भी बढ़ रहे हैं। सोसायटी की समस्याओं को उठाने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) बनाई है। इसके अलावा, यहां से नगर निगम के पार्षद भी हैं। इसके बावजूद पार्किंग की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। सड़कों पर गति सीमा दर्शाने वाले साइनबोर्ड नहीं हैं। तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों के कारण हादसों का अंदेशा बना रहता है। इस इलाके को चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाने का दावा किया जाता है, लेकिन यहां पर्याप्त साइनबोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। कौन-सी कॉलोनी, सोसायटी या सेक्टर कहां है, इसकी जानकारी देने वाले बोर्ड भी नहीं हैं।


सेक्टर एक की पांच भी बड़ी समस्याएं
कई भवनों तक सड़क की सुविधा नहीं।
सीढ़ियों और रास्तों पर लटकते तारों से हादसों का खतरा।
लावारिस कुत्तों का आतंक, सेक्टर-वन में बढ़ रही संख्या।
सेक्टर-वन के लिए एचआरटीसी टैक्सी की अलग सुविधा नहीं।
पेयजल आपूर्ति की टाइमिंग गलत, कभी तड़के सुबह आता है पानी।


आंकड़ों में जानें सोसायटी
2011 में पंजीकृत हुई थी यह सोसायटी।
10 हजार है इस क्षेत्र की आबादी।
690 फ्लैट और मकान हैं यहां।

पेयजल आपूर्ति का समय गलत
क्षेत्र में ज्यादातर समय पेयजल आपूर्ति की टाइमिंग सही नहीं रहती। कई बार तड़के सुबह पानी आता है। पूछताछ करने पर बताया जाता है कि वोल्टेज कम है। हमारी मांग है कि पेयजल आपूर्ति की टाइमिंग सही होनी चाहिए और रोज पानी मिलना चाहिए।
विक्रम सिंह सेन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आरडब्ल्यूए


पेड़ों की छंटाई की जाए
सड़क किनारे पेड़ों की टहनियों ने स्ट्रीट लाइटों को पूरी तरह ढक दिया है। इस वजह से अंधेरा रहता है। पैदल चलने वाले लोगों को स्ट्रीट लाइटें होने के बावजूद परेशानी झेलनी पड़ रही है। नगर निगम को पेड़ों की इन शाखाओं की छंटाई करवानी चाहिए।
-सुमन पाल दत्ता, महासचिव, आरडब्ल्यूए


बुजुर्ग पर लावारिस कुत्तों ने किया हमला
लावारिस कुत्ते इस इलाके के लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग को लावारिस कुत्तों ने काट लिया। इस मामले में नगर निगम ने भी संज्ञान नहीं लिया। निगम को ऐसे खूंखार कुत्तों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें खुले में नहीं छोड़ना चाहिए।
-सोहन फोतेदार, स्थानीय निवासी


जगह-जगह लगे साइनबोर्ड
कहने के लिए तो यह पॉश इलाका है, लेकिन यहां चंडीगढ़ की तर्ज पर साइनबोर्ड तक नहीं लगे हैं। इस वजह से रास्ता भटकने के कारण लोगों को परेशानी होती है। नगर निगम के साथ-साथ हाउसिंग बोर्ड को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। जगह-जगह साइनबोर्ड लगाए जाने चाहिए।
-चंद्र मोहन वालिया, स्थानीय निवासी


वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जाए टैक्सी
इस सोसायटी के लिए एचआरटीसी टैक्सी की एक भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इससे बुजुर्गों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां टैक्सी सेवाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। हम सालों से एचआरटीसी को ज्ञापन सौंप रहे हैं, लेकिन विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
-डॉ. अशोक शर्मा, स्थानीय निवासी


तारों के जंजाल से चलना हुआ मुश्किल
सेक्टर-वन में तारों का जंजाल है। जियो और एयरटेल की तारें खंभों पर लटक रही हैं। सड़कों और रास्तों के किनारे केबल के रोल पड़े हुए हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होती है। कुछ लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन इन तारों और केबल के रोल को हटाया तक नहीं गया है।
-रमेश कपूर, स्थानीय निवासी


जहां-जगह, वहां बनाई पार्किंग
लोगों की सुविधा का खास ख्याल रखा गया है। लोगों ने पार्किंग के लिए जिन जगहों पर मांग की थी, वहां इसकी व्यवस्था भी की गई है। लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा गया है। पेड़ों की शाखाएं काटने का मामला उठाया है। कुत्तों को लेकर भी नगर निगम से कार्रवाई करने को कहा है।
-आशा शर्मा, पार्षद, पटयोग वार्ड


बाहर निकलने का रास्ता नहीं
न्यू शिमला में आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है। यहां आगजनी जैसी घटना होने पर बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते नहीं हैं। आवाजाही के लिए एक ही पॉइंट है। पार्किंग की पर्याप्त सुविधा नहीं है। बिजली की तारें अब भी पेड़ों पर लटकी हुई हैं।

-दीपक रोहाल, पूर्व पार्षद, पटयोग वार्ड


बढ़ाई जा रही पार्किंग सुविधा
हर वार्ड में पार्किंग की सुविधा बढ़ाई जा रही है। पार्षदों की ओर से जो भी प्रस्ताव आते हैं, उन पर काम किया जा रहा है। न्यू शिमला में भी नगर निगम ने कई नई पार्किंग बनाई हैं। यदि कहीं और भी जगह उपलब्ध है, तो पार्षद उसके लिए प्रस्ताव भेज सकते हैं।
सुरेंद्र चौहान, महापौर, नगर निगम शिमला
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