{"_id":"6a7204a018ff7c8bfd017eb7","slug":"ors-will-act-as-a-shield-against-diarrhea-drink-boiled-water-shimla-news-c-19-sml1002-764570-2026-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: डायरिया से बचाव में ढाल बनेगा ओआरएस, उबला पानी पीएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: डायरिया से बचाव में ढाल बनेगा ओआरएस, उबला पानी पीएं
विज्ञापन
आईजीएमसी के पीडियाट्रिक विभाग ने दिए टिप्स, डायरिया के लक्षण दिखते ही बच्चों को पिलाएं ओआरएस
बरसात में मटमैले पानी से बढ़ जाता है डायरिया का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात के बाद अब डायरिया फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसको देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के चिकित्सकों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को डायरिया से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीमें भी लोगों को घरद्वार पर डायरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, दूध की बोतलों की साफ-सफाई और उबला हुआ पानी पीने से डायरिया के खतरे को कम किया जा सकता है। आईजीएमसी के पीडियाट्रिक विभाग की ओर से अभिभावकों को भी बच्चों को डायरिया से बचाने के उपायों की जानकारी दी गई। मंगलवार को बाल रोग ओपीडी के बाहर अभिभावकों को जागरूक किया। अभिभावकों को बताया कि बच्चों में डायरिया के लक्षण दिखते ही उन्हें तुरंत ओआरएस का घोल पिलाएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो सके। बरसात के दौरान बारिश के बाद खड्डों में मटमैला पानी आ जाता है। कई बार इसी पानी की आपूर्ति शहरों में की जाती है, जिससे डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गलत खानपान और स्वच्छता की कमी से भी समस्या बढ़ सकती है।
लक्षण और बचाव
पतला मल, पेट दर्द, उल्टी और मतली, तेज बुखार, कमजोरी, पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) डायरिया के प्रमुख लक्षण हैं। इससे बचाव के लिए उबला हुआ या साफ पानी पिएं, ताजा खाना खाएं, फल और सब्जियां धोकर खाएं, ओआरएस का घोल पिएं और हाथों को अच्छी तरह धोएं।
विज्ञापन
कोट
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण दूषित जल, भोजन या गंदे हाथों के माध्यम से मुंह तक पहुंचते हैं। स्वच्छता के नियमों का पालन कर दस्त के मामलों को 40 फीसदी से अधिक कम किया जा सकता है। अभिभावकों से आग्रह है कि बच्चों और स्वयं के हाथ धोकर ही खाना परोसें। डायरिया के लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। ओआरएस का घोल बनाकर सेवन करें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
-डॉ. मंगला सूद, बाल रोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी
विज्ञापन
बरसात में मटमैले पानी से बढ़ जाता है डायरिया का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात के बाद अब डायरिया फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसको देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के चिकित्सकों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को डायरिया से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीमें भी लोगों को घरद्वार पर डायरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, दूध की बोतलों की साफ-सफाई और उबला हुआ पानी पीने से डायरिया के खतरे को कम किया जा सकता है। आईजीएमसी के पीडियाट्रिक विभाग की ओर से अभिभावकों को भी बच्चों को डायरिया से बचाने के उपायों की जानकारी दी गई। मंगलवार को बाल रोग ओपीडी के बाहर अभिभावकों को जागरूक किया। अभिभावकों को बताया कि बच्चों में डायरिया के लक्षण दिखते ही उन्हें तुरंत ओआरएस का घोल पिलाएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो सके। बरसात के दौरान बारिश के बाद खड्डों में मटमैला पानी आ जाता है। कई बार इसी पानी की आपूर्ति शहरों में की जाती है, जिससे डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गलत खानपान और स्वच्छता की कमी से भी समस्या बढ़ सकती है।
विज्ञापन
लक्षण और बचाव
पतला मल, पेट दर्द, उल्टी और मतली, तेज बुखार, कमजोरी, पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) डायरिया के प्रमुख लक्षण हैं। इससे बचाव के लिए उबला हुआ या साफ पानी पिएं, ताजा खाना खाएं, फल और सब्जियां धोकर खाएं, ओआरएस का घोल पिएं और हाथों को अच्छी तरह धोएं।
विज्ञापन
कोट
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण दूषित जल, भोजन या गंदे हाथों के माध्यम से मुंह तक पहुंचते हैं। स्वच्छता के नियमों का पालन कर दस्त के मामलों को 40 फीसदी से अधिक कम किया जा सकता है। अभिभावकों से आग्रह है कि बच्चों और स्वयं के हाथ धोकर ही खाना परोसें। डायरिया के लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। ओआरएस का घोल बनाकर सेवन करें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
-डॉ. मंगला सूद, बाल रोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी