हिमाचल विधानसभा सत्र: होटल ठेके पर देने के आरोप में विपक्ष का वाकआउट, सीएम ने बिठाई जांच
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हिमाचल टूरिज्म के होटलों को ठेके पर देने के आरोप में विपक्ष ने मंगलवार को सदन में जमकर हंगामा किया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विपक्ष के आरोप पर मामले की जांच करने के आदेश दे दिए और सदन में ही मुख्य सचिव से तीन दिन में रिपोर्ट भी मांग ली।
इसके बाद मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया। इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने टूरिज्म की संपत्तियों पर चर्चा करने की अनुमति मांगी।
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नियम-67 के तहत अनुमति न मिलने पर विपक्ष ने हंगामा करना शुरू कर दिया। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने दोनों ओर से एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार हिमाचल की बोली लगा रही है, टूरिज्म के 16 होटल ठेके पर दिए जा रहे हैं। बाकायदा सरकार की राइजिंग हिमाचल वेबसाइट पर एचपीटीडीसी की संपत्तियां बेचने के लिए लिस्ट अपलोड की गई है।
इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार टूरिज्म के होटलों को ठेके पर देने के पक्ष में नहीं है। होटलों को ठेके पर देने के लिए न तो कैबिनेट ने फैसला लिया है और न ऐसा कोई आदेश जारी हुआ है। साइट पर जो लिस्ट डाली है, वह मानवीय त्रुटि है।
सीएम ने सदन में ये कहा
इसकी जैसे ही जानकारी मिली, इसे तुरंत हटाने के निर्देश दे दिए गए। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और इस साइट चढ़ाने वाले जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई होगी।
विपक्ष के वाकआउट करने के बाद मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राज्य सरकार की टूरिज्म यूनिट बेचने की कोई मंशा नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि संपत्तियां हमने नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बेची गईं।
वाइल्ड फ्लावर हॉल जो टूरिज्म की प्राइम प्रापर्टी थी। कांग्रेस ने इसे सत्ता में रहते हुए वर्ष 1995 में बेच दिया। राज्य सरकार को आज तक इससे एक भी पैसा नहीं मिला। कुल्लू के एंगलो कटराई होटल को भी निजी हाथों में दे दिया गया।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से ठीक पहले एचपी सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट-1972 के तहत चाय बगानों के चेंज ऑफ लैंड यूज किए जाने का निर्णय लिया। हालांकि हमारी सरकार ने हिमाचल के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे आगे नहीं बढ़ने दिया।