हिमाचल प्रदेश: सड़कें बनीं, राजस्व एंट्री भूले अधिकारी; कोर्ट पहुंचे एक हजार मामले
प्रदेश में लोगों की जमीन पर सड़कें तो बन गईं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इन सड़कों की एंट्री करना अधिकारी भूल गए। अब यही लापरवाही सरकार और लोगों के लिए विवाद का कारण बन गई है।
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हिमाचल प्रदेश में लोगों की जमीन पर सड़कें तो बन गईं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इन सड़कों की एंट्री करना अधिकारी भूल गए। अब यही लापरवाही सरकार और लोगों के लिए विवाद का कारण बन गई है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा में माना कि अधिकारियों की नालायकी के कारण सड़कों और रास्तों की राजस्व एंट्री समय पर नहीं हो पाई, जिसके चलते करीब एक हजार मामले अदालतों में पहुंच गए हैं।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक विनोद सुल्तानपुरी के मूल सवाल और मलेंद्र राजन व संजय अवस्थी के अनुपूरक सवालों के जवाब में राजस्व मंत्री ने कहा कि लंबे समय से जनता के इस्तेमाल में आ रहे रास्तों और सड़कों को प्रतिकूल कब्जे या रास्ते के अधिकार के आधार पर नियमित करने के लिए सरकार ने कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। कई मामलों में लोगों ने सड़क निर्माण और अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए अपनी जमीन स्वेच्छा से दे दी। निर्माण कार्य भी हो गया, लेकिन बाद में जमीन की राजस्व एंट्री संबंधित विभाग के नाम नहीं करवाई गई।
राष्ट्रपति की मंजूरी में अटका अहम विधेयक
अब जमीन मालिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय पर राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री नहीं होने से भविष्य में विवाद पैदा होते हैं और मामले अदालतों तक पहुंच जाते हैं। राजस्व मंत्री ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक एंट्री करवाने के निर्देश दिए हैं। नेगी ने बताया कि विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश लोक उपयोगिता परिवर्तन निषेध विधेयक 2025 राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है। करीब एक साल से इसकी मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि लोकहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक को सरकार दोबारा विधानसभा में लाएगी। इस बाबत मुख्यमंत्री से भी चर्चा हो गई है।
मौके पर होगी खसरा-गिरदावरी, रिकॉर्ड होगा दुरुस्त
सरकार ने राजस्व रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति जानने के लिए खसरा-गिरदावरी मौके पर करने के निर्देश भी दिए हैं। इसका मकसद रिकॉर्ड को जमीन की वास्तविक स्थिति के अनुरूप दुरुस्त करना और भूमि व रास्तों से जुड़े विवादों को कम करना है। विधायक संजय अवस्थी ने अर्की का मामला उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में भी इसी तरह के विवाद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि फोरलेन निर्माण के लिए जमीन देने वाले लोगों को अभी तक पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है। उन्होंने सरकार से प्रभावित जमीन मालिकों के मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग की।
परौर-पधर फोरलेन के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू : विक्रमादित्य
प्रदेश में कांगड़ा और मंडी जिलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने वाली प्रस्तावित परौर-पधर फोरलेन परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल के सवाल के जवाब में बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का कार्य कंसल्टेंट को सौंप दिया है। मंत्री ने बताया कि एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय शिमला ने परौर से पधर तक प्रस्तावित फोरलेन निर्माण के लिए डीपीआर तैयार करने का कार्य 12 मार्च 2026 को अवाॅर्ड किया था। वर्तमान में सड़क की अलाइनमेंट तय करने का कार्य प्रारंभिक चरण में है।
ऐसे में परियोजना का अंतिम स्वरूप, निर्माण का दायरा और कार्य शुरू होने की समयसीमा डीपीआर तैयार और स्वीकृत होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। परौर-पधर फोरलेन परियोजना को मध्य हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बनने से कांगड़ा और मंडी के बीच यातायात सुगम होगा। पर्यटन, व्यापार और स्थानीय लोगों की आवाजाही को नई गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, चक्की से परौर तक प्रस्तावित फोरलेन परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। इस परियोजना का निर्माण पांच पैकेजों में किया जाना प्रस्तावित है। इनमें से एक पैकेज का निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जबकि तीन पैकेजों पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। शेष एक पैकेज के लिए डीपीआर तैयार करने का कार्य जारी है। चक्की-परौर फोरलेन परियोजना से अब तक 5,734 परिवार अथवा व्यक्ति प्रभावित हुए हैं। इन्हें मुआवजा देने के लिए प्राधिकरण से बात की जाएगी।