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Shimla News: अब नहीं लगती डुबकी, मग से ही करना पड़ता है स्नान

Wed, 14 Jan 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 11:59 PM IST
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Now there is no need to take a dip, one has to take bath with a mug only.
तत्तापानी में डूब गए हैं गर्म पानी के स्रोत
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तत्तापानी में साल दर साल घट रही है श्रद्धालुओं की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। मकर संक्रांति पर तत्तापानी में इस वर्ष बीते सालों के मुकाबले कम लोग स्नान के लिए पहुंचे थे। लोगों के मुताबिक कुछ वर्षों से श्रद्धालुओं की संख्या घटती जा रही है।
यहां प्राकृतिक चश्मे सूखने के बाद स्नान के लिए बनाए स्नानागार में गंदगी फैल रही है। पहले लोग सतलुज के किनारे प्राकृतिक गर्म जलस्रोतों में स्नान करते थे, अब बनाए कृत्रिम स्नानागार में मग के साथ नहाना पड़ता है। मकर संक्रांति के लिए प्रशासन की तरफ से महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग स्नानागार बनाए थे। पुरुषों के लिए चार और महिलाओं के लिए तीन जगह नहाने की व्यवस्था की थी। मंडी जिले के तत्तापानी के अलावा करसोग, छतरी, सुंदरनगर और शिमला के सुन्नी, कुमारसैन, जुन्गा आदि से लोग स्नान करने आते थे।
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लोगों का मानना है कि सतलुज नदी पर कोल डैम बनने के बाद गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख गए हैं। यहां लोग पहले डुबकी लगाकर स्नान करते थे, अब मग से स्नान होता है। इस कारण स्नानागार पर गंदगी बढ़ गई है। तत्तापानी में मकर संक्रांति पर परोसी जाने वाली खिचड़ी अभी भी देसी घी के साथ परोसी जाती है। आज भी इस खिचड़ी को तांबे के बर्तनों में तैयार किया जाता है। रमेश सूद ने बताया कि वह कई सालों से यहां पर खिचड़ी और देसी घी का भंडारा लगा रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सतलुज नदी में राफ्टिंग शुरू की है। यह अब लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है।
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कारोबार हो गया चौपट
कुमारसैन के बुजुर्ग गोविंद राम ने बताया कि वह कई सालों से इस मेले में दुकान लगाने आते हैं लेकिन अब मेला धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। मेले में लोग कम हैं। कुछ साल ऐसा ही चलता रहा तो मेला खत्म हो जाएगा। मेले में करोड़ों का कारोबार होता था, अब चौपट हो गया है।



मग से नहाने में नहीं आता मजा
तत्तापानी के रहने वाले कृष्णलाल ने बताया कि मेले की रौनक खत्म हो गई है। पहले भारी संख्या में दूर-दूर से लोग आते थे। अब लोग नहीं आते। कोल डैम बनने के बाद प्राकृतिक जल स्रोत डूब गए हैं। इनके डूबने से मग से नहाने में वह मजा नहीं आता जो सतलुज किनारे स्नान करने में आता था।
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