नोबेल पुरस्कार विजेताओं की चीन को नसीहत
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दलाईलामा को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की 25वीं वर्षगांठ और महात्मा गांधी जयंती पर मुख्य बौद्ध मंदिर मैकलोडगंज में निर्वासित तिब्बत सरकार की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में विशेष अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता जोडी विलियम्स ने कहा कि हमारा विरोध नोबेल शांति शिखर सम्मेलन के मेजबान देश दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नहीं था। यह चीन के खिलाफ विरोध का संदेश था। दक्षिण अफ्रीका की सरकार के खिलाफ विरोध का संदेश इतना ही था कि उसने अपनी आत्मा और संप्रुभता बेच दी।
हम दलाईलामा और तिब्बती लोगों के के साथ दृढ़ता के साथ खड़े रहेंगे। नोबेल विजेता शिरिन इबादी ने कहा कि विश्व भर के लोगों ने दलाईलामा से बहुत कुछ सीखा है। हमें उम्मीद है कि ऐसा जशभन हम तिब्बत में भी मनाएंगे। दलाईलामा से विश्व ने प्यार और करुणा सीखी है। हमें आशा है कि चीन की सरकार भी दलाईलामा से यह सीखेगी।
तिब्बतियन के अधिकारों का सम्मान करे चीन
चीन को तिब्बतियन और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। हिंसा किसी भी सरकार के लिए वायरस की तरह होती है। इसलाम हिंसक धर्म नहीं है। मैंने भारतीय संसद में 2005 में भाषण के दौरान दो अक्तूबर को महात्मा गांधी जयंती को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने का आग्रह किया था जिसे मान लिया गया। इस अवसर पर निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डाक्टर लोबसंग सांग्ये ने कहा कि महात्मा गांधी ऐसे व्यक्ति थे जो नोबेल शांति पुरस्कार असली हकदार थे।
निर्वासित तिब्बत संसद के सभापति पेंपा शेरिंग ने चीनी राष्ट्रपति से मांग की कि वह अपने देश के लोगों और अल्पसंख्यकों को आजादी का हक दें। समारोह में तिब्बती समुदाय के लोगों ने पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर खूब समां बांधा। इस अवसर पर निर्वासित तिब्बत सरकार के सांसदों सहित पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोंछे भी मौजूद रहे।