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हिमाचल: नौणी विवि के वीसी का फैसला निरस्त, एचएएस अधिकारी ही रहेगा रजिस्ट्रार

Tue, 06 Oct 2026 08:21 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 06 Oct 2026 08:21 PM IST
सार

बागवानी विभाग के सचिव सी पाल रासू की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की आपात शक्तियों के तहत किसी वैधानिक पद पर नियुक्त अधिकारी को हटाकर दूसरे अधिकारी को उस पद का कार्यभार नहीं सौंपा जा सकता। 

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Himachal: Nauni University VC's decision overturned; HAS officer to remain Registrar.
नौणी विवि - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में रजिस्ट्रार को लेकर कुलपति के फैसले को सरकार ने अगले ही दिन निरस्त कर दिया। कुलपति डॉ. एचएस बवेजा ने 5 अक्तूबर को एचएएस अधिकारी रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां समाप्त कर डॉ. डीपी शर्मा को रजिस्ट्रार का कार्यभार सौंपा था। सरकार ने इस आदेश को 6 अक्तूबर को तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी कर दिया। इसके साथ ही सिद्धार्थ आचार्य को रजिस्ट्रार पद पर बहाल कर दिया गया।

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बागवानी विभाग के सचिव ने ये कहा
बागवानी विभाग के सचिव सी पाल रासू की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कुलपति की आपात शक्तियों के तहत किसी वैधानिक पद पर नियुक्त अधिकारी को हटाकर दूसरे अधिकारी को उस पद का कार्यभार नहीं सौंपा जा सकता। सरकार ने कहा कि रजिस्ट्रार विश्वविद्यालय का वैधानिक पद है और इससे संबंधित अधिकार अधिनियम और नियमों के तहत निर्धारित हैं। सचिव ने आदेश में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी अधिनियम, 1986 की धारा 25(7) का हवाला दिया है। सरकार के अनुसार कुलपति की आपात शक्तियों का इस्तेमाल किसी पद पर नियुक्त अधिकारी को हटाने या उसके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त करने के लिए नहीं किया जा सकता।

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फाइलें और रिकॉर्ड भी लौटाने के निर्देश
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि 5 अक्तूबर के आदेश के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय की कोई फाइल, रिकॉर्ड, रजिस्टर, मुहर, चाबी या अन्य सरकारी संपत्ति किसी अधिकारी को सौंपी गई हो तो उसे सिद्धार्थ आचार्य को वापस किया जाए। विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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रजिस्ट्रार के हक छीनने पर भड़की एचएएस एसोसिएशन, कुलपति पर कार्रवाई की मांग
नौणी विवि में रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य के अधिकार वापस लिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) एसोसिएशन ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य सचिव केके पंत को विरोध पत्र भेजा है। एसोसिएशन ने कार्यवाहक कुलपति डॉ. एचएस बवेजा के आदेश को न केवल अवैध और असांविधानिक बताया है, बल्कि इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में सीधा हस्तक्षेप भी करार दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रवण मांटा ने पत्र में कहा है कि रजिस्ट्रार विवि का वैधानिक पद है और इस पद पर तैनात एचएएस अधिकारी की नियुक्ति राज्य सरकार करती है। ऐसे में किसी भी कुलपति को रजिस्ट्रार के प्रशासनिक, वैधानिक अथवा वित्तीय अधिकार वापस लेने का अधिकार नहीं है।

एसोसिएशन का आरोप है कि कार्यवाहक कुलपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी किया है, जो कानून की दृष्टि में शून्य और निरस्त किए जाने योग्य है। पत्र में दावा किया गया है कि रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य सरकार के लिखित निर्देशों के अनुरूप कार्य कर रहे थे। ऐसे में सरकारी निर्देशों का पालन करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि यह कदम विवि प्रशासन की ओर से सरकारी निगरानी को दरकिनार करने का प्रयास प्रतीत होता है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे कदमों पर रोक नहीं लगी तो इससे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का मनोबल टूटेगा और विश्वविद्यालयों सहित स्वायत्त संस्थानों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी। एसोसिएशन का कहना है कि किसी शैक्षणिक प्रशासक की ओर से राज्य कैडर अधिकारियों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना खतरनाक परंपरा को जन्म देगा।

एसोसिएशन ने सरकार से यह उठाई मांगें
कार्यवाहक कुलपति के आदेश को तुरंत रद्द कर रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य के सभी अधिकार बहाल किए जाएं। कार्यवाहक कुलपति डॉ. एचएस बवेजा के खिलाफ अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। सभी विश्वविद्यालयों और स्वायत्त संस्थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सरकार की ओर से तैनात अधिकारियों को मनमाने हस्तक्षेप और प्रशासनिक उत्पीड़न से सुरक्षा मिल सके।

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