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Nerchowk Medical College: निजी भूमि पर बना है नेरचौक मेडिकल कॉलेज, मालिक ने मांगा 10 अरब रुपये मुआवजा

Tue, 16 Jul 2024 10:25 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 16 Jul 2024 10:25 AM IST
सार

नेरचौक मेडिकल कॉलेज पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भूमि के मालिक ने जमीन का 10 अरब से अधिक मुआवजा मांगा है। क्या है पूरा मामला पढ़ें...

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Nerchowk Medical College is built on private land owner demanded compensation of 10 billion rupees
कोर्ट फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेरचौक में स्थापित मेडिकल कॉलेज सहित अन्य संपत्तियों पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद अब मेडिकल कॉलेज सहित अन्य संस्थानों के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भूमि के मालिक ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में इजराय याचिका दायर कर इस संपत्ति का 10 अरब से अधिक मुआवजा मांगा है।

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इस मामले के तथ्यों के अनुसार गत वर्ष 19 जुलाई को उच्चतम न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय एस ओका और संजय करोल की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार की उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को रद्द कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश उच्च न्यायालय के डिविजन बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए माना था कि यह प्रदेश सरकार की ओर से स्वीकार किया गया है कि भूमि का मालिक सुल्तान मुहम्मद विभाजन के बाद कभी पाकिस्तान नहीं गया था, बल्कि वह साल 1983 में अपनी मृत्यु तक हिमाचल में रहा था। ऐसे में उन्हें विस्थापित नहीं कहा जा सकता। इन तथ्यों को स्वीकारने के बावजूद प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले की अपील करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय ने अनुचित मानते हुए प्रदेश सरकार पर 25 हजार रुपये की कॉस्ट भी लगाई थी।
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उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में माना था कि याचिकाकर्ताओं के पूर्वज सुल्तान मोहम्मद को मुहाल नेर और भंगरोटू की वादग्रस्त भूमि का मालिक था। मगर सरकार ने भूमि को विस्थापित भूमि घोषित कर इसकी नीलामी कर दी थी और इसे विभिन्न विभागों को दे दिया था।
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उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के बाद अब सुल्तान मुहम्मद के उत्तराधिकारी मीर बक्श तथा अन्यों ने अधिवक्ता आरएल चौधरी और एचआर सिद्धु के माध्यम से प्रदेश उच्च न्यायालय में इजराय याचिका दायर की है। इसमें याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर स्थित है और यह राजमार्ग से सौ मीटर के भीतर स्थित है और ऐसे में इसकी कीमत करीब 15 लाख बिस्वा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार नेर मुहाल में उनकी 67 बीघा और भंगरोटू मुहाल में 25 बीघा जमीन है, जिसकी मुआवजा राशि करीब दस अरब रुपये बनता है।
 

भूमि पर है ये संस्थान
इस भूमि में इस समय मेडिकल कॉलेज, कृषि, बागवानी, एग्रो इंडस्ट्री, पशुपालन विभाग, लघु सचिवालय, उपमंडलाधिकारी आदि के कार्यालय, स्टोर, भवन तथा स्टाफ के रिहायशी भवन हैं। जबकि अन्य भूमि को निजी लोगों को नीलाम कर दिया गया है। उन्होंने आगे इन जमीनों को बेच दिया है। हालांकि इस पूरी संपत्ति की कीमत करीब 50 हजार करोड़ हो सकती है, लेकिन याचिकाकर्ता इस मामले को बीच का रास्ता अपना कर सुलझाने के इच्छुक हैं। ऐसे में उन्होंने करीब 10 अरब रुपये की मुआवजा राशि जमीन और नकदी के रूप में मांगी है।

झटींगरी में नहीं लेंगे जमीन : याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें प्रशासन की ओर से जो जमीन झटींगरी में तबादले के रूप में देने की पेशकश है, वो कदापि सही नहीं है, क्योंकि उनकी भूमि की कीमत इस समय करीब 15 लाख रुपये बिस्वा है, जबकि प्रस्तावित भूमि की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बिस्वा है।

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